Swaraj Times Desk: कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम् रविवार को उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद स्थित गढ़मुक्तेश्वर पहुंचे, जहां उन्होंने विपक्षी दलों पर कड़े शब्दों में हमला बोला. एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि यह भारत के लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि विपक्ष देश को “बांग्लादेश जैसी स्थिति” में ले जाना चाहता है. उनका आरोप था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राष्ट्रहित में लिए जा रहे फैसलों का बिना वजह विरोध किया जा रहा है और संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाई जा रही है.
आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा कि वह और उनकी टीम हर मुद्दे पर सरकार का विरोध करना ही अपना लक्ष्य बना चुकी है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री यह भी कह दें कि सूर्य पूर्व से उगता है, तो भी राहुल गांधी और उनकी पूरी टीम उसका विरोध करेगी. उनके अनुसार, यह विरोध किसी सिद्धांत पर आधारित नहीं, बल्कि केवल नफरत की राजनीति है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संसद को जानबूझकर हंगामे का केंद्र बनाया जा रहा है.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव पर भी आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव एक पढ़े-लिखे और समझदार व्यक्ति हैं, लेकिन राहुल गांधी के साथ आने के बाद उनकी भाषा और बयानबाजी बदल गई है. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि राहुल गांधी का “राहु” इतना प्रभावशाली है कि वह अब अखिलेश यादव पर भी हावी हो गया है, इसी कारण वह अनर्गल बातें कर रहे हैं. उन्होंने समाजवाद और परिवारवाद की तुलना करते हुए कहा कि समाजवाद का जन्म परिवारवाद के विरोध में हुआ था, लेकिन अब इसे ही परिवारवाद का रूप दे दिया गया है.
गढ़मुक्तेश्वर में नेह नीड संस्था के वार्षिकोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने संस्था के कार्यों की सराहना भी की. उन्होंने कहा कि भारत के भविष्य के निर्माण में ऐसी संस्थाओं की बड़ी भूमिका है, जो निस्वार्थ भाव से समाज सेवा कर रही हैं. उनके अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जो दूरदर्शी विजन है—भारत को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना—उसी दिशा में नेह नीड जैसी संस्थाएं कार्य कर रही हैं.
एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) को लेकर विपक्ष के विरोध पर भी उन्होंने नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि मतदाता सूची की शुद्धता लोकतंत्र की मजबूती के लिए जरूरी है, लेकिन विपक्ष इसे भी राजनीतिक रंग देने में लगा है. उनका कहना था कि सड़कों से लेकर संसद तक विरोध कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.
इसके अलावा, पश्चिम बंगाल में बाबर के नाम पर मस्जिद निर्माण के मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम् ने कहा कि उन्हें मस्जिद या चर्च बनने से आपत्ति नहीं है, लेकिन आक्रमणकारियों और लुटेरों के नाम पर किसी धार्मिक स्थल का निर्माण गलत है. उन्होंने कहा कि बाबर, तैमूर, चंगेज खान और औरंगजेब जैसे शासकों ने भारत की संस्कृति और अस्मिता को नुकसान पहुंचाया.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जुड़े हिजाब विवाद पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री राज्य का अभिभावक होता है. यदि एक पिता अपनी बेटी से स्नेहपूर्वक मिलता है, तो उसमें अनावश्यक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है.
