Swaraj Times Desk: महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े बदलाव की ओर बढ़ती नजर आ रही है। निकाय चुनावों से ठीक पहले सियासी हलचल तेज हो गई है और नए गठबंधनों की चर्चाएं जोर पकड़ रही हैं। शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने संकेत दिए हैं कि राज ठाकरे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के साथ गठबंधन लगभग तय माना जा सकता है। राउत के बयान ने न सिर्फ सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है, बल्कि मुंबई की राजनीति में संभावित बड़े उलटफेर के संकेत भी दे दिए हैं।
संजय राउत का दावा: गठबंधन अब औपचारिक ऐलान के करीब
रविवार को मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा कि शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के बीच चल रही बातचीत अपने अंतिम चरण में है। उनके अनुसार, हाल ही में हुई बैठक निर्णायक रही और अगले दो से तीन दिनों में गठबंधन की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
राउत ने यह भी साफ किया कि बदलते राजनीतिक हालात में भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए विपक्षी दलों का एकजुट होना बेहद जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि निकाय चुनाव केवल स्थानीय सत्ता का सवाल नहीं हैं, बल्कि आने वाले विधानसभा चुनावों की दिशा भी यहीं से तय होगी।
MVA में मतभेद: कांग्रेस की आपत्तियां बनीं चुनौती
हालांकि, महा विकास आघाड़ी (MVA) के भीतर सब कुछ सहज नहीं दिख रहा है। संजय राउत ने यह स्वीकार किया कि कांग्रेस को मनसे के साथ गठबंधन को लेकर कुछ बुनियादी आपत्तियां हैं। उनका कहना था कि कांग्रेस नेतृत्व ने मनसे की राजनीतिक विचारधारा और पुराने बयानों को लेकर चिंता जाहिर की है।
राउत के मुताबिक, शिवसेना (यूबीटी) कांग्रेस को यह समझाने की कोशिश कर रही है कि मौजूदा समय में भाजपा जैसी ताकत से मुकाबले के लिए सभी मतभेदों को फिलहाल पीछे रखना होगा। फिर भी, कांग्रेस की सहमति इस गठबंधन के लिए सबसे बड़ी बाधा मानी जा रही है।
कांग्रेस के अलग सुर और 15 जनवरी का सियासी इम्तिहान
जहां एक ओर शिवसेना (यूबीटी) और मनसे की नजदीकियां बढ़ती दिख रही हैं, वहीं कांग्रेस के रुख ने तस्वीर को जटिल बना दिया है। कांग्रेस महासचिव और महाराष्ट्र प्रभारी रमेश चेन्निथला पहले ही साफ कर चुके हैं कि पार्टी कार्यकर्ता मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव स्वतंत्र रूप से लड़ने के पक्ष में हैं।
कांग्रेस का कहना है कि वह मुंबई के धर्मनिरपेक्ष चरित्र की रक्षा के लिए अकेले मैदान में उतरना चाहती है और भ्रष्टाचार, स्वास्थ्य सेवाओं व प्रदूषण जैसे मुद्दों को चुनावी हथियार बनाएगी।
गौरतलब है कि मुंबई समेत राज्य के 29 नगर निगमों के चुनाव 15 जनवरी को होने हैं और 16 जनवरी को नतीजे आएंगे। यदि शिवसेना (यूबीटी) और मनसे का गठबंधन औपचारिक रूप लेता है, तो यह ठाकरे परिवार के राजनीतिक पुनर्मिलन के साथ-साथ मराठी वोट बैंक के समीकरण को भी पूरी तरह बदल सकता है। आने वाले दिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए बेहद निर्णायक साबित हो सकते हैं।
