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Swaraj Times Desk: आम बजट को पेश किए जाने में अब करीब सवा महीने का समय बचा है और जैसे-जैसे बजट की तारीख नजदीक आ रही है, वैसे-वैसे आम लोगों, उद्योग जगत और निवेशकों की उम्मीदें भी बढ़ती जा रही हैं। हर बार की तरह इस बार भी लोगों को टैक्स में राहत, महंगाई पर काबू और रोजगार के नए अवसरों की आस है, जबकि सरकार के सामने राजकोषीय घाटे को सीमित रखने और आर्थिक विकास को गति देने की दोहरी चुनौती बनी हुई है।

ताजा रिपोर्ट्स संकेत दे रही हैं कि आगामी केंद्रीय बजट के जरिए सरकार लक्षित राजकोषीय समर्थन प्रदान कर घरेलू मांग को मजबूती देने की दिशा में कदम उठा सकती है। इससे न सिर्फ आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिलेगा, बल्कि यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विकास-उन्मुख मौद्रिक नीति के भी अनुरूप होगा।

घरेलू मांग पर रहेगा फोकस

वैश्विक परामर्श फर्म ईवाई (EY) के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में आयकर और जीएसटी दरों में संभावित कटौती से सरकार के राजस्व पर कुछ दबाव पड़ सकता है। हालांकि, गैर-कर राजस्व में वृद्धि और राजस्व व्यय में संभावित कटौती के जरिए सरकार अपने राजकोषीय घाटे और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) के लक्ष्यों को साध सकती है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि हाल के महीनों में तंबाकू उत्पादों पर उत्पाद शुल्क और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं जन स्वास्थ्य उपकर जैसे कदम उठाए गए हैं। संसद की मंजूरी के बाद ये उपाय लागू हो चुके हैं, जिससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलने की उम्मीद है।

ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डी. के. श्रीवास्तव का मानना है कि आने वाले समय में भारत को आर्थिक वृद्धि के लिए अपनी मजबूत घरेलू मांग पर अधिक निर्भर रहना होगा। वित्त वर्ष 2026-27 का आम बजट आरबीआई की नीतियों के साथ तालमेल बनाकर अर्थव्यवस्था को अतिरिक्त प्रोत्साहन दे सकता है।

वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की स्थिति

‘ईवाई इकॉनमी वॉच’ रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक अनिश्चितताओं और प्रतिकूल परिस्थितियों के चलते निकट भविष्य में शुद्ध निर्यात का योगदान जीडीपी वृद्धि में नकारात्मक रह सकता है। हाल की तिमाहियों में भी इसका असर देखा गया है।

हालांकि, मध्यम अवधि में तस्वीर अधिक सकारात्मक नजर आती है। घरेलू निजी निवेश में तेजी, बुनियादी ढांचे पर बढ़ता खर्च और वैश्विक आपूर्ति शृंखला से जुड़ी बाधाओं के धीरे-धीरे कम होने से भारत की आर्थिक वृद्धि दर मजबूत बनी रह सकती है।

विकास दर को लेकर अनुमान

ईवाई का अनुमान है कि भारत आने वाले समय में औसतन करीब 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर बनाए रख सकता है। वहीं, भारतीय रिजर्व बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है। यह दर्शाता है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है।

कुल मिलाकर, आगामी आम बजट से यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार संतुलित नीति अपनाते हुए घरेलू मांग को बढ़ावा देगी, निवेश और रोजगार को प्रोत्साहित करेगी और साथ ही राजकोषीय अनुशासन भी बनाए रखेगी। यही संतुलन भारत की आर्थिक रफ्तार को आने वाले वर्षों में मजबूती प्रदान कर सकता है।

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