Swaraj Times Desk: बांग्लादेश की राजनीति में लंबे समय बाद एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम देखने को मिला है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकारी अध्यक्ष और देश के अगले प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदार तारिक रहमान 17 साल के स्वनिर्वासन के बाद ढाका लौट आए हैं। उनकी वापसी केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि गहरे प्रतीकात्मक संदेशों से भरी रही। शाहजलाल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरते ही रहमान ने नंगे पैर बांग्लादेशी धरती पर कदम रखे, जिसे उनके समर्थकों ने “राजनीतिक पुनर्जन्म” का संकेत बताया।
ढाका पहुंचने के कुछ ही घंटों बाद तारिक रहमान ने हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए शांति, स्थिरता और समावेशी समाज की बात की। उन्होंने साफ कहा कि बांग्लादेश किसी एक धर्म या समुदाय का नहीं, बल्कि मुसलमानों, हिंदुओं, बौद्धों और ईसाइयों सभी का साझा देश है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है, जब बीते एक साल में बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं, के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आई हैं।
अपने भाषण में रहमान ने अमेरिकी नागरिक अधिकार नेता मार्टिन लूथर किंग जूनियर के ऐतिहासिक कथन ‘I Have a Dream’ का जिक्र करते हुए कहा कि उनके पास भी अपने देश के लिए एक सपना है। उन्होंने कहा कि वह ऐसा बांग्लादेश बनाना चाहते हैं, जहां हर नागरिक बिना डर के घर से बाहर निकल सके और सुरक्षित वापस लौट सके। यह बयान सीधे तौर पर अल्पसंख्यक समुदायों को भरोसा दिलाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
तारिक रहमान ने 1971 का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह स्वतंत्रता संग्राम के दौरान सभी धर्मों और वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर देश को आज़ादी दिलाई थी, उसी तरह आज भी बांग्लादेश को एकजुटता की जरूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के पीछे भी जनता की सामूहिक ताकत थी।
गौरतलब है कि शेख हसीना के सत्ता से बाहर होने के बाद बांग्लादेश में कई जगहों पर हिंदुओं पर हमले हुए, जिन पर भारत ने भी चिंता जताई है। हाल ही में ढाका और मैमेनसिंह जैसे शहरों में हुई हिंसक घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल खड़े किए। ऐसे में तारिक रहमान का “समावेशी बांग्लादेश” का वादा बेहद अहम माना जा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तारिक रहमान अल्पसंख्यकों को यह संदेश देना चाहते हैं कि बीएनपी सत्ता में आने पर सुरक्षा और बराबरी के अधिकार सुनिश्चित किए जाएंगे। हालांकि आलोचकों का कहना है कि यह केवल चुनावी रणनीति भी हो सकती है।
रहमान की वापसी के दौरान उनकी सुरक्षा के लिए लगभग 4,000 सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। उन्होंने अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस का भी आभार जताया। फरवरी में होने वाले चुनावों से पहले तारिक रहमान की यह वापसी बांग्लादेश की राजनीति की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित कर सकती है।
अब सवाल यही है—क्या तारिक रहमान का “ड्रीम” बांग्लादेशी हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों के लिए हकीकत बनेगा या यह सिर्फ एक राजनीतिक वादा बनकर रह जाएगा?
