कमजोर डॉलर और मजबूत आर्थिक आंकड़ों से भारतीय रुपये ने दिखाई वापसी की ताकत
Swaraj Times Desk: लंबी गिरावट और रिकॉर्ड निचले स्तरों को छूने के बाद भारतीय रुपये ने आखिरकार थोड़ी राहत ली है। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में रुपये में हल्की मजबूती देखने को मिली और यह 3 पैसे चढ़कर 89.95 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। पिछले कुछ दिनों से डॉलर के मजबूत रुख और विदेशी निवेश की भारी निकासी से दबाव झेल रही घरेलू मुद्रा को इस बार सहारा मिला कमजोर होते डॉलर इंडेक्स और बेहतर औद्योगिक उत्पादन के आंकड़ों से।
डॉलर पर क्यों भारी पड़ा रुपया?
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये ने मंगलवार सुबह 89.98 के स्तर पर खुलकर कुछ ही देर में 89.95 प्रति डॉलर का स्तर छू लिया। यह पिछले बंद भाव की तुलना में 3 पैसे की मजबूती दर्शाता है।
डॉलर इंडेक्स, जो 6 प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को मापता है, 0.03% की गिरावट के साथ 98.01 पर आ गया। डॉलर की यह कमजोरी रुपये के लिए राहत का बड़ा कारण बनी।
विदेशी निवेश और बाजार का दबाव अभी भी बरकरार
हालांकि, रुपये की उछाल सीमित रही क्योंकि विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार भारतीय बाजार से निकासी कर रहे हैं।
सोमवार को FIIs ने 2,759.89 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा।
घरेलू शेयर बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली –
- सेंसेक्स – 209.32 अंक गिरकर 84,486.22 पर
- निफ्टी – 63.25 अंक फिसलकर 25,878.85 पर
इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 0.03% की मामूली बढ़ोतरी (61.96 डॉलर प्रति बैरल) ने भी रुपया उछाल को सीमित किया।
इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन बना गेम–चेंजर
भारतीय रुपये को मजबूत करने वाला सबसे बड़ा पॉजिटिव सिग्नल रहा देश का औद्योगिक उत्पादन डेटा।
नवंबर में भारत का IIP दो साल के उच्च स्तर पर पहुंच गया और उत्पादन वृद्धि दर 6.7% दर्ज की गई।
खनन और विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) सेक्टर में मजबूत परफॉर्मेंस ने संकेत दिए कि भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूती से आगे बढ़ रही है।
संकेत क्या बताते हैं?
क्रूड ऑयल कीमतें स्थिर → समर्थन बना रहेगा
डॉलर की कमजोरी → रुपये को राहत
औद्योगिक उत्पादन मजबूत → आर्थिक भरोसा बढ़ा
FII सेलिंग और कमजोर शेयर बाजार → उछाल सीमित
