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सीट बंटवारे से बाहर किए जाने पर RPI का पलटवार – मुंबई की सियासत में बढ़ी हलचल

Swaraj Times Desk: बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 को लेकर महाराष्ट्र की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। केंद्र की एनडीए सरकार के सहयोगी रामदास अठावले ने बड़ा कदम उठाते हुए अपनी पार्टी RPI (A) के उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। पार्टी ने अब तक 39 कैंडिडेट्स के नाम सामने रखे हैं और संकेत दिया है कि वे 50 सीटों तक पर अपना दावा पेश कर सकते हैं।

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना ने सीट बंटवारे का ऐलान किया, जिसमें बीजेपी को 137 सीटें और शिवसेना को 90 सीटें दी गईं। कुल 227 वार्ड वाले BMC में इस समझौते में RPI को एक भी सीट न दिए जाने पर अठावले ने खुलकर नाराजगी जताई।


अठावले का आरोप – “ये विश्वासघात है”

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी भड़ास निकालते हुए अठावले ने लिखा:

“हम महायुति के गठन से लेकर आज तक पूरी निष्ठा के साथ खड़े रहे। लेकिन बीएमसी चुनाव के लिए सीट बंटवारे में हमें बाहर रखना सिर्फ अपमान नहीं – विश्वासघात है।”

अठावले ने यह भी दावा किया कि सोमवार शाम 4 बजे उनकी NDA सहयोगियों से सीट बंटवारे पर चर्चा होनी थी, लेकिन बैठक कैंसल कर दी गई — जिसे उन्होंने पार्टी के सम्मान पर चोट करार दिया।


“अपमान बर्दाश्त नहीं करूंगा” – RPI प्रमुख

अठावले ने साफ कहा कि वे अपने कार्यकर्ताओं का यह अपमान स्वीकार नहीं करेंगे और पार्टी अब अकेले चुनाव लड़ेगी।
RPI सूत्रों के मुताबिक –

  • 50 सीटों पर नामांकन दाखिल किया जाएगा
  • हालांकि परिस्थिति सुधरने पर नामांकन वापस भी लिया जा सकता है
  • बशर्ते बीजेपी–शिवसेना सम्मानजनक संवाद के लिए आगे आएं

यानी दरवाजा पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन RPI अब “कमजोर सहयोगी” की भूमिका निभाने के मूड में नहीं।


BMC चुनाव में नए समीकरण?

जहां महायुति (BJP–Shiv Sena–NCP) को एकजुट दिखाने की कोशिश हो रही थी, वहीं अब cracks खुलकर सामने आ गए हैं।
दिलचस्प बात यह है कि अजित पवार की NCP भी इस बार अकेले चुनाव लड़ेगी, यानी गठबंधन के अंदर असंतोष का माहौल है।


BMC चुनाव सिर्फ मुंबई की निकाय सरकार नहीं — बल्कि महाराष्ट्र की सियासत की दिशा तय करने वाला बैरोमीटर माना जाता है।
रामदास अठावले के इस फैसले ने बीजेपी–शिवसेना के लिए मुश्किलें जरूर बढ़ा दी हैं।
क्या RPI अंत तक अकेले मैदान में रहेगी या आखिरी वक्त में समीकरण बदलेंगे — अब पूरी नज़र 2026 की चुनावी तैयारियों पर है।

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