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मंदिर में भस्म आरती – एक्ट्रेस ने किया जल अर्पण, लेकिन बयानबाज़ी ने खोल दी विवाद की नई आग!

Swaraj Times Desk: बॉलीवुड अभिनेत्री नुसरत भरूचा इन दिनों अपने फिल्मी करियर से ज्यादा धार्मिक यात्रा को लेकर चर्चा में हैं। उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भस्म आरती के दौरान उनका दर्शन करना और भगवान महाकाल को जल अर्पित करना सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। जहां कई लोगों ने इसे उनकी श्रद्धा और आध्यात्मिक आस्था का प्रतीक बताया, वहीं मुस्लिम धर्मगुरुओं का एक वर्ग इस पर भड़क उठ गया।

मौलाना का बयान – “शरीयत के मुताबिक गुनाह”

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने अभिनेत्री के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई है। बरेली से जारी अपने बयान में उन्होंने कहा कि “एक मुस्लिम महिला का मंदिर में पूजा–पाठ करना, जल चढ़ाना और हिंदू धार्मिक अनुष्ठान करना इस्लाम और शरीयत के खिलाफ है।”
उनके अनुसार, नुसरत भरूचा का यह कृत्य शरीयत की नज़र में “गुनाह-ए-अजीम”, यानी बड़ा गुनाह है। रजवी ने आगे कहा कि अभिनेत्री को तौबा (पश्चाताप) करना चाहिए और इस्तेग़फ़ार व कलमा पढ़कर अपने कर्मों के लिए अल्लाह से माफी मांगनी चाहिए।


नुसरत की यात्रा क्यों चर्चा में?

नुसरत हाल ही में उज्जैन पहुंचीं जहां उन्होंने कड़कड़ाती ठंड के बीच सुबह की भस्म आरती में सम्मिलित होकर पूरी विधि–विधान से दर्शन किए। वीडियो और तस्वीरों में वह पारंपरिक भारतीय परिधान में दिखाई दीं, हाथों में जल लिए भगवान महाकाल की पूजा करती हुईं।
इसके बाद सोशल मीडिया पर उन्हें समर्थन देने वालों ने कहा – “भगवान सबके हैं, श्रद्धा निजी है” – वहीं आलोचकों ने इसे धार्मिक मर्यादा से जोड़कर बहस शुरू कर दी।


सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा

जैसे ही मौलाना रजवी का बयान सामने आया, इंटरनेट पर बहस तेज हो गई।
एक पक्ष – नुसरत की स्वतंत्रता और उनकी आस्था का सम्मान करने की मांग कर रहा है
दूसरा पक्ष – कह रहा है कि धर्म बदलकर पूजा-पाठ करना गलत है

ट्विटर पर कई लोगों ने लिखा –

“धर्म इंसान के दिल में होता है, पूजा का तरीका किसी का बंधक नहीं।”

वहीं कुछ दूसरे यूज़र्स ने कहा –

“अगर आप किसी धर्म से आते हैं तो उसके नियमों का पालन भी होना चाहिए।”


किस तरफ झुक रही बहस?

यह पूरा मामला एक बार फिर उस सवाल पर केंद्रित हो जाता है –
क्या एक कलाकार और नागरिक को धार्मिक सीमाओं से ऊपर उठकर पूजा–अर्चना करने का अधिकार नहीं है?
फिलहाल अभिनेत्री ने इस विवाद पर कोई टिप्पणी नहीं दी है। लेकिन इतना तय है कि महाकाल दर्शन की शांत सुबह अब धार्मिक राजनीति की गर्म बहस में बदल चुकी है।

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