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मुंबई वार्ड 173 से चुनावी ड्रामा – ‘पार्टी ने नहीं दिया टिकट, तो मैंने खुद बना लिया!’ – आरोपों के बाद BJP में हड़कंप

Swaraj Times Desk: महाराष्ट्र में होने वाले BMC Election 2026 के लिए माहौल गर्म है। टिकट बंटवारे के साथ ही अब मैदान में एक दिलचस्प और चौंकाने वाला मामला सामने आया है। मुंबई के वार्ड नंबर 173 में एक उम्मीदवार ने ऐसी चाल चली कि पूरा सियासी गलियारा हिल गया। बीजेपी ने जिस उम्मीदवार को टिकट ही नहीं दिया – उन्होंने खुद ही नकली AB फॉर्म लगाकर नामांकन दाखिल कर दिया। यह मामला सामने आते ही पार्टी ने इसे गंभीर चुनावी अपराध बताते हुए चुनाव आयोग से शिकायत की है।

किसके खिलाफ आरोप?

कथित रूप से यह कारनामा किया है – केके शिल्पा केलुस्कर ने। आरोप है कि जब बीजेपी ने उन्हें आधिकारिक टिकट और “AB फॉर्म” नहीं दिया, तो उन्होंने डुप्लीकेट / नकली AB फॉर्म लगाकर नामांकन पत्र भर दिया।
AB फॉर्म वह दस्तावेज होता है, जिससे यह प्रमाणित होता है कि उम्मीदवार पार्टी का आधिकारिक प्रत्याशी है – जो चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में बेहद अहम माना जाता है।

BJP ने आयोग को लिखा पत्र – कैंसिल करवाया नामांकन?

मामला उजागर होते ही BJP मुंबई प्रेसिडेंट अमित साटम ने इलेक्शन कमीशन को एक आधिकारिक शिकायत पत्र भेजा।
उन्होंने मांग की है कि शिल्पा केलुस्कर द्वारा जमा किया गया AB फॉर्म रद्द किया जाए और उन्हें पार्टी का समर्थन मिलने के किसी भी दावे को खारिज किया जाए।

पत्र में कहा गया है कि –

“भारतीय जनता पार्टी शिल्पा केलुस्कर को कोई भी आधिकारिक एबी फॉर्म जारी नहीं कर रही है। उन्होंने बिना अनुमति और बिना अधिकार नकली फॉर्म जमा किया है – कृपया उनके नामांकन को अमान्य घोषित कर दिया जाए।”

टिकट न मिलने का दर्द – या सियासी दांव-पेच?

चुनाव नजदीक आते ही दलों में टिकट के लिए आंतरिक टकराव तेज हो जाता है। कई वार्डों में एक ही पार्टी के नेता आपस में भिड़ते दिख रहे हैं। ऐसे में यह मामला सामने आने के बाद यह संदेह गहरा हो गया है कि –
क्या यह “टिकट छिनने की नाराज़गी” का नतीजा था,
या फिर “अंदर ही अंदर किसी ने जीत की संभावनाओं को बचाने के लिए शातिर चाल चली”?

सूत्रों का कहना है कि वार्ड 173 से BJP की ओर से किसी और उम्मीदवार को आधिकारिक टिकट दिया गया था, इसलिए शिल्पा केलुस्कर का यह कदम अचानक सबको चौका गया।

आयोग की कार्रवाई – अब क्या होगा?

अब गेंद चुनाव आयोग के पाले में है। यदि जांच में AB फॉर्म को फर्जी पाया गया, तो यह सिर्फ नामांकन निरस्त होने का मामला नहीं रहेगा – बल्कि चुनावी नियमों के तहत यह कानूनी अपराध भी माना जाएगा और उन पर कार्रवाई संभव है।


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