नैनीताल–भीमताल–कैंचीधाम रोपवे से बदलेगी पर्यटन की तस्वीर,
मैदानों से पहाड़ों तक सफर होगा आसान
Swaraj Times Desk: उत्तराखंड घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए राहत भरी खबर है। अब मैदानों से नैनीताल, कैंचीधाम और भीमताल तक पहुंचना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो सकता है। केंद्र और राज्य सरकार के निर्देशों पर एक निजी कंपनी ने इन प्रमुख पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले रोपवे प्रोजेक्ट का सर्वे शुरू कर दिया है। भीमताल से शुरू हुए इस सर्वे के बाद स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों में उम्मीद जगी है कि आने वाले समय में पहाड़ों पर लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलेगी।
हर साल पर्यटन सीजन और वीकेंड पर नैनीताल, भीमताल और कैंचीधाम जाने वाली सड़कों पर घंटों लंबा ट्रैफिक जाम लग जाता है। खासतौर पर भवाली और रानीबाग क्षेत्र में वाहनों की कतारें आम समस्या बन चुकी हैं। इसी परेशानी को देखते हुए सरकार ने रोपवे को एक स्थायी समाधान के तौर पर आगे बढ़ाने का फैसला किया है।
कहां-कहां बनेंगे रोपवे स्टेशन
प्रस्तावित योजना के मुताबिक रोपवे का पहला स्टेशन रानीबाग में बनाया जा सकता है, जबकि दूसरा स्टेशन भीमताल में प्रस्तावित है। इसके बाद भीमताल से भवाली, भवाली से नैनीताल और आगे कैंचीधाम तक रोपवे चलाने की संभावनाओं पर सर्वे किया जा रहा है। कुल मिलाकर करीब 35 किलोमीटर लंबी इस रोपवे लाइन में लगभग पांच स्टेशन बनाए जाने की योजना है।
भीमताल से शुरू हुआ सर्वे
रोपवे कंपनी के सुपरवाइजर मयंक श्रीवास्तव के अनुसार, एजेंसी ने भीमताल के सिडकुल क्षेत्र से अत्याधुनिक मशीनों के जरिए सर्वे कार्य शुरू कर दिया है। इस दौरान पहाड़ी भूगोल, ढलान, हवा की दिशा और पर्यावरणीय पहलुओं का भी बारीकी से अध्ययन किया जा रहा है, ताकि परियोजना सुरक्षित और टिकाऊ हो।
पर्यटन और अर्थव्यवस्था को मिलेगा फायदा
रोपवे परियोजना के पूरा होने से न सिर्फ सड़क यातायात का दबाव कम होगा, बल्कि पर्यटक हवा में सफर करते हुए पहाड़ों और झीलों के प्राकृतिक सौंदर्य का भी आनंद ले सकेंगे। इससे क्षेत्र में पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी और होटल, टैक्सी, गाइड व अन्य स्थानीय कारोबारों को भी फायदा होगा। माना जा रहा है कि यह परियोजना उत्तराखंड के पर्यटन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगी।
