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SIT रिपोर्ट से बड़ा खुलासा, 2016 के केस को हथियार बनाकर रची गई थी सत्ता को हिलाने वाली साजिश

Swaraj Times Desk: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे को झूठे आपराधिक मामले में फंसाने की कथित साजिश का खुलासा हुआ है. इस पूरे प्रकरण में विशेष जांच दल (SIT) ने पूर्व डीजीपी संजय पांडे समेत तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की सिफारिश की है.

यह मामला ठाणे नगर पुलिस थाने में दर्ज साल 2016 के एक पुराने केस से जुड़ा है. SIT की रिपोर्ट के अनुसार, इस केस को दोबारा खोलकर तत्कालीन विपक्ष के नेता रहे देवेंद्र फडणवीस और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे को कानूनी पचड़े में फंसाने की कोशिश की गई. रिपोर्ट राज्य की पूर्व डीजीपी रश्मी शुक्ला ने अपनी सेवानिवृत्ति से कुछ दिन पहले गृह विभाग को सौंपी थी.

2016 के केस को क्यों बनाया गया हथियार?

SIT की जांच में सामने आया कि 2016 में श्यामसुंदर अग्रवाल के खिलाफ एक मामला दर्ज हुआ था, जो बिल्डर संजय पुनमिया के साथ साझेदारी विवाद से जुड़ा था. इस केस में 2017 में चार्जशीट दाखिल हो चुकी थी. इसके बावजूद, वर्षों बाद बिना ठोस कारण के दोबारा जांच के आदेश दिए गए, जिसे SIT ने संदिग्ध माना है.

पुलिस अधिकारियों पर दबाव के आरोप

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने गवाहों पर बयान बदलने और राजनीतिक नेताओं के नाम जोड़ने का दबाव बनाया. अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर पूछताछ, धमकाने और केस को राजनीतिक रंग देने के आरोप भी सामने आए हैं. ठाणे और मुंबई के साइबर पुलिस थानों में दर्ज मामलों को आधार बनाकर फडणवीस को आरोपी बनाने की कोशिश बताई गई है.

एक्सटॉर्शन और फॉरेंसिक सबूत

बिल्डर संजय पुनमिया ने आरोप लगाया कि 2021 से 2024 के बीच पुराने केस की दोबारा जांच के नाम पर उन्हें परेशान किया गया और पैसे की मांग की गई. उनकी शिकायत पर एक्सटॉर्शन का केस दर्ज हुआ. SIT ने ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच कराई, जिसमें बातचीत की पुष्टि हुई.

लॉगबुक गायब, सबूत मिटाने का शक

SIT रिपोर्ट में सरकारी गाड़ी की लॉगबुक के पन्ने गायब होने का भी जिक्र है, जिसे सबूत मिटाने की कोशिश माना गया है. यही नहीं, बातचीत में यह सवाल भी उठा कि फडणवीस और शिंदे की गिरफ्तारी अब तक क्यों नहीं हुई.

अब SIT की सिफारिशों के बाद राज्य सरकार आगे क्या कार्रवाई करती है, इस पर पूरे महाराष्ट्र की नजरें टिकी हुई हैं.

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