CENTCOM के ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ से कांपा ISIS नेटवर्क, आतंकियों को अमेरिका का सख्त संदेश
Swaraj Times Desk: सीरिया में आतंकी संगठन ISIS के खिलाफ अमेरिका ने एक बार फिर बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड US Central Command (CENTCOM) ने ‘ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक’ के तहत ISIS के दर्जनों ठिकानों को निशाना बनाते हुए भीषण हवाई हमले किए हैं. इस सैन्य कार्रवाई में 35 से अधिक आतंकी ठिकानों को पूरी तरह तबाह कर दिया गया है.
CENTCOM ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह हमला अमेरिकी समयानुसार दोपहर करीब 12:30 बजे शुरू हुआ. सीरिया के अलग-अलग इलाकों में फैले ISIS के कमांड सेंटर, हथियार डिपो और प्रशिक्षण ठिकानों को सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर निशाना बनाया गया.
आतंक के खिलाफ अमेरिका का सख्त संदेश
CENTCOM के मुताबिक, यह अभियान आतंकवाद के खिलाफ अमेरिका की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है. इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों, सहयोगी बलों और नागरिकों पर होने वाले संभावित आतंकी हमलों को पहले ही रोकना है. बयान में साफ कहा गया कि जो भी अमेरिकी बलों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, उसे दुनिया के किसी भी कोने में बख्शा नहीं जाएगा.
पलमायरा हमले के बाद तेज हुई कार्रवाई
ऑपरेशन हॉकआई स्ट्राइक की शुरुआत 19 दिसंबर 2025 को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर की गई थी. यह फैसला 13 दिसंबर 2025 को सीरिया के पलमायरा क्षेत्र में हुए ISIS हमले के बाद लिया गया था. उस हमले में दो अमेरिकी सैनिकों और एक अमेरिकी नागरिक की मौत हो गई थी, जिसके बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई का मन बना लिया था.
90 से ज्यादा सटीक हथियारों का इस्तेमाल
CNN समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सैन्य अभियान में 90 से अधिक प्रिसीजन गाइडेड म्यूनिशन का इस्तेमाल किया गया. करीब दो दर्जन से ज्यादा लड़ाकू विमानों ने एक साथ इस ऑपरेशन में हिस्सा लिया. हमले इतने सटीक थे कि आतंकियों के ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा, जबकि आम नागरिकों को न्यूनतम क्षति पहुंची.
ISIS नेटवर्क को बड़ा झटका
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई ‘ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व’ के तहत ISIS को पूरी तरह कमजोर करने की रणनीति का अहम हिस्सा है. रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस हमले से सीरिया में सक्रिय ISIS नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है और संगठन की पुनर्गठन क्षमता पर गंभीर असर पड़ेगा.
अमेरिका के इस कदम से यह साफ संकेत गया है कि आतंकवाद के खिलाफ उसकी नीति में कोई नरमी नहीं होगी और जरूरत पड़ने पर ऐसे अभियान आगे भी जारी रह सकते हैं.
