प्रदर्शन, इंटरनेट बंद, फ्लाइट्स रद्द और ट्रंप का सख्त रुख—ईरान में हालात क्यों बन रहे हैं विस्फोटक?
Swaraj Times Desk: ईरान में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं और इसी बीच अमेरिका ने बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने 12 जनवरी 2026 को आपात सुरक्षा चेतावनी जारी करते हुए ईरान में मौजूद अपने सभी नागरिकों से बिना देरी देश छोड़ने को कहा है. इस एडवाइजरी के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह सवाल उठने लगा है कि क्या ईरान में कोई बड़ा घटनाक्रम होने वाला है.
अमेरिका का इमरजेंसी अलर्ट क्यों अहम?
अमेरिकी प्रशासन के मुताबिक ईरान में सुरक्षा स्थिति “अत्यंत अस्थिर” हो चुकी है. सरकार विरोधी प्रदर्शनों, हिंसक झड़पों और सख्त दमन के बीच हालात किसी भी वक्त और बिगड़ सकते हैं. अमेरिका ने साफ कहा है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकता, इसलिए समय रहते देश छोड़ना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है.
प्रदर्शनों में जान-माल का भारी नुकसान
बीते दो हफ्तों से ईरान के कई बड़े शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं. अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के अनुसार अब तक सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि हजारों प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया है. सुरक्षा बलों पर अत्यधिक बल प्रयोग के आरोप लग रहे हैं, जिसे लेकर मानवाधिकार संगठनों ने भी चिंता जताई है.
दोहरी नागरिकता वालों पर ज्यादा खतरा
अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अमेरिका-ईरान दोहरी नागरिकता रखने वालों को सबसे ज्यादा जोखिम है. ईरान दोहरी नागरिकता को मान्यता नहीं देता और ऐसे लोगों पर कठोर कानून लागू किए जा सकते हैं. अमेरिकी पासपोर्ट या अमेरिका से जुड़े सबूत भी गिरफ्तारी का कारण बन सकते हैं.
इंटरनेट बंद, देश दुनिया से कटा ईरान
प्रदर्शनों को दबाने के लिए ईरान सरकार ने देशभर में इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बंद कर दी हैं. इससे न सिर्फ आम लोगों की आवाज दब रही है, बल्कि बाहर की दुनिया तक सही जानकारी पहुंचना भी मुश्किल हो गया है.
फ्लाइट्स रद्द, एयरपोर्ट लगभग ठप
अशांति के चलते कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने ईरान के लिए उड़ानें निलंबित कर दी हैं. तेहरान का प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा लगभग अलग-थलग पड़ चुका है, जिससे देश छोड़ना और भी चुनौतीपूर्ण हो गया है.
ट्रंप का सख्त संदेश
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान में हो रही कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाया है. व्हाइट हाउस संकेत दे चुका है कि अगर हालात ‘रेड लाइन’ पार करते हैं तो सैन्य विकल्प भी खुले रहेंगे.
इन तमाम घटनाओं ने यह संकेत दे दिया है कि ईरान सिर्फ आंतरिक संकट ही नहीं, बल्कि एक बड़े अंतरराष्ट्रीय टकराव के मुहाने पर भी खड़ा हो सकता है.
