• Wed. Mar 11th, 2026

मौनी अमावस्या की भारी भीड़ के बीच रथ रोकने पर भड़के शंकराचार्य, लगाए पुलिस पर गंभीर आरोप

Swaraj Times Desk: Magh Mela 2026 Controversy: प्रयागराज में चल रहे माघ मेला 2026 के दौरान मौनी अमावस्या के पावन अवसर पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया. संगम नोज पर श्रद्धालुओं की जबरदस्त भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के रथ को आगे बढ़ने से रोक दिया. प्रशासन का कहना था कि सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को देखते हुए रथ से उतरकर पैदल चलना जरूरी है, लेकिन इस फैसले से संत समाज में नाराजगी फैल गई.

भीड़ के कारण रोका गया रथ

मौनी अमावस्या पर संगम क्षेत्र में लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए पहुंचे थे. हालात को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने वाहनों और रथों की आवाजाही पर अस्थायी रोक लगा दी. इसी क्रम में शंकराचार्य के रथ को भी रोका गया और उनके काफिले से पैदल आगे बढ़ने का अनुरोध किया गया.

धक्का-मुक्की और तनावपूर्ण हालात

प्रशासनिक रोक के बाद शंकराचार्य के समर्थक आगे बढ़ने लगे, जिससे पुलिस और संतों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई. मौके पर मौजूद पुलिस बल ने स्थिति को संभालने की कोशिश की, लेकिन कुछ देर के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया. फिलहाल शंकराचार्य का जुलूस वहीं रुका हुआ है और वरिष्ठ अधिकारी हालात पर नजर बनाए हुए हैं.

‘संतों को मारा जा रहा है’—शंकराचार्य का आरोप

घटना के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखा बयान दिया. उन्होंने कहा,
“बड़े-बड़े अधिकारी संत को मार रहे हैं. पुलिस वाले संतों के साथ मारपीट कर रहे हैं. हमने कहा कि हम सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन हमें अपमानित किया जा रहा है.”
उन्होंने यह भी कहा कि प्रशासन के कहने पर वे लौटने लगे थे, लेकिन उसी दौरान संतों के साथ कथित तौर पर मारपीट की गई.

स्नान न करने का ऐलान, फिर बदला रुख

पहले शंकराचार्य ने कहा कि वे प्रशासन के व्यवहार से आहत होकर स्नान नहीं करेंगे. बाद में उन्होंने रुख बदलते हुए कहा,
“अब हम कहीं नहीं जाएंगे, स्नान करेंगे. अगर हमें रोक सकते हैं तो रोक लें.”
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब ऊपर से मिले आदेशों के तहत हो रहा है और इसमें योगी आदित्यनाथ का नाम भी लिया.

प्रशासन की चुनौती

यह घटना एक बार फिर माघ मेले जैसे विशाल धार्मिक आयोजन में भीड़ प्रबंधन और संत-प्रशासन समन्वय की चुनौतियों को उजागर करती है. प्रशासन का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोपरि है, जबकि संत समाज इसे सम्मान और स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *