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ऑपरेशन सिंदूर से लेकर पार्टी लाइन तक, शशि थरूर ने खुद बताया कहां और क्यों अलग राय रखी

Swaraj Times Desk: कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने एक बार फिर पार्टी के भीतर मतभेदों को लेकर अपनी स्थिति साफ की है. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि संसद के भीतर उन्होंने कभी भी कांग्रेस की घोषित लाइन का उल्लंघन नहीं किया. थरूर के मुताबिक, सिद्धांत के स्तर पर उनका एकमात्र सार्वजनिक मतभेद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर रहा है, जिस पर वह आज भी बिना किसी खेद के कायम हैं.

केरल साहित्य महोत्सव में पूछे गए सवालों के जवाब में शशि थरूर ने कहा कि उन्हें लेकर जो यह धारणा बनाई जाती है कि वह बार-बार पार्टी से अलग राय रखते हैं, वह पूरी तरह सही नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के रिकॉर्ड में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है, जहां उन्होंने पार्टी के आधिकारिक रुख के खिलाफ वोट किया हो या बयान दिया हो.

ऑपरेशन सिंदूर पर क्यों अलग राय?

थरूर ने बताया कि पहलगाम की घटना के बाद उन्होंने एक अखबार में लेख लिखा था. उस लेख में उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सख्त लेकिन सीमित कार्रवाई की वकालत की थी. उनका तर्क था कि कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए, जिसमें केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया जाए, ताकि आम नागरिकों को नुकसान न पहुंचे और हालात पूरी तरह बेकाबू न हों. थरूर ने साफ कहा कि यह उनका वैचारिक स्टैंड था और है, जिसे लेकर उन्हें कोई पछतावा नहीं है.

‘मेरी कुछ समस्याएं हैं’ बयान का मतलब

अपने बयान में शशि थरूर ने यह भी माना कि पार्टी के भीतर कुछ मुद्दों पर उनकी असहमति रही है. उन्होंने कहा कि हर पार्टी में विचारों की विविधता होती है और लोकतंत्र में यह स्वाभाविक भी है. मतभेद का मतलब बगावत नहीं होता. थरूर के अनुसार, उनकी असहमति हमेशा नीति और सिद्धांत के स्तर पर रही है, न कि संगठनात्मक अनुशासन को तोड़ने के लिए.

कांग्रेस को लेकर क्या बोले थरूर?

थरूर ने यह भी दोहराया कि वह कांग्रेस के मूल्यों और विचारधारा से जुड़े हुए हैं. उनका कहना है कि पार्टी को मजबूत करने के लिए भीतर से सवाल पूछना और बहस करना जरूरी है. उन्होंने संकेत दिया कि स्वस्थ असहमति किसी भी राजनीतिक दल को कमजोर नहीं, बल्कि मजबूत बनाती है.

सियासी मायने

शशि थरूर के इस बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है, जब कांग्रेस के भीतर नेतृत्व, रणनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बहस चल रही है. थरूर का यह साफ करना कि उनका मतभेद सिर्फ एक मुद्दे तक सीमित है, पार्टी के भीतर फैली अटकलों पर विराम लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

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