दावोस स्पीच से विवाद, ट्रंप की नाराज़गी और टैरिफ हमले की धमकी—कनाडा की विदेश नीति पर नया मोड़
Swaraj Times Desk: स्विट्ज़रलैंड में हुए दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में Mark Carney के वक्तव्य ने कूटनीतिक हलचल मचा दी थी। कार्नी ने उस मंच से दुनिया की “मिडिल पावर्स” को एकजुट होकर व्यापार दबाव और टैरिफ हथियार के खिलाफ लड़ने का आह्वान किया था। लेकिन अब, Donald Trump के साथ हुई फोन बातचीत के बाद, उन्होंने उन टिप्पणियों से पीछे हटने का संकेत दिया है—और यह खुलासा अमेरिका के वित्त सचिव स्कॉट बेसेंट ने किया है।
ट्रंप से हुई फोन बातचीत में क्या कहा गया?
26 जनवरी को हुए फोन में, स्कॉट बेसेंट के मुताबिक, ट्रंप ने मार्क कार्नी से उनकी दावोस स्पीच को लेकर सवाल किए और बताया कि तर्कों ने अमेरिका पर नकारात्मक असर छोड़ा। बेसेंट का दावा है कि इस बातचीत के दौरान कार्नी ने स्पष्ट रूप से अपनी टिप्पणियों से दूरी बना ली। बेसेंट ने कहा कि “कार्नी ने खुद अपने बयान को वापस लिया या उसे नरम किया”—विशेष रूप से वह भाग जिसमें उन्होंने व्यापार और टैरिफ को वैश्विक दबाव के उपकरण के रूप में वर्णित किया था।
बेसेंट ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “ट्रम्प और कार्नी ने बातचीत की और कार्नी ने अपने कुछ बयान बदल दिए। अगर सार्थक टैरिफ—जैसे 100 प्रतिशत—कनाडा पर लगाया जाता, तो यह उनके लिए बहुत बड़ा झटका होता”। इस बयान का आशय साफ था कि कनाडा अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए विवेकपूर्ण रुख अपनाना चाहता है।
दावोस स्पीच में क्या कहा था कार्नी ने?
दावोस में दिए गए भाषण में कार्नी ने संकेत दिया था कि सुपरपावर्स अब व्यापार को हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं। उन्होंने कहा कि मिडिल पावर्स को एकजुट रहने की जरूरत है, नहीं तो “वे टेबल पर नहीं दिखाई देंगे।” यह बयान न सिर्फ ग़लतफ़हमी का कारण बना बल्कि ट्रंप के विरोध का भी।
ट्रंप का दृष्टिकोण और प्रभाव
ट्रम्प ने कहा था कि इस तरह की टिप्पणियाँ अमेरिका के आर्थिक दबदबे को कमजोर कर सकती हैं। उन्होंने बोर्ड ऑफ पीस—एक अंतरराष्ट्रीय शांति मंच जिसमें अरब देशों के साथ मिलकर शांति और पुनर्निर्माण पर काम किया जाना है—में कार्नी की सदस्यता का न्योता रद्द भी कर दिया, क्योंकि दोनों के बीच रणनीतिक मतभेद साफ दिखे।
अब आगे क्या?
कार्नी की “पीछे हटने” वाली टिप्पणी यह दर्शाती है कि वैश्विक कूटनीति में व्यापार, सैन्य-रणनीति और आर्थिक दबाव के मुद्दे अब और जटिल हो गए हैं। कनाडा अपनी वैश्विक पहलों तथा अमेरिका के साथ व्यापारिक रिश्तों को संतुलित रखने की कोशिश कर रहा है, जबकि इस पहल का असर विश्व राजनीतिक और आर्थिक समीकरणों पर नजर आएगा।
