उच्च शिक्षा में बराबरी या नया विवाद — अब फैसला देश की सबसे बड़ी अदालत के हाथ में
Swaraj Times Desk: देशभर के विश्वविद्यालयों में लागू किए गए UGC के नए ‘इक्विटी रेगुलेशंस 2026’ अब सुप्रीम कोर्ट की चौखट पर पहुंच गए हैं। इन नियमों को चुनौती देते हुए दाखिल याचिका पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ गुरुवार को सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि ये नियम जातीय भेदभाव खत्म करने के बजाय एक नए तरह के असंतुलन को जन्म दे सकते हैं।
क्या है विवाद की जड़?
UGC ने 15 जनवरी 2026 से “Promotion of Equity in Higher Education Regulations” लागू किए हैं। इनका घोषित उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों में जातिगत भेदभाव रोकना और समावेशी माहौल बनाना है। नए नियमों में SC, ST और OBC वर्गों को जातिगत भेदभाव से सुरक्षा देने के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।
हर कॉलेज और विश्वविद्यालय को
✔ समान अवसर केंद्र स्थापित करना
✔ विशेष शिकायत निवारण समिति बनाना
✔ 24×7 हेल्पलाइन शुरू करना
✔ तय समयसीमा में शिकायतों का निपटारा करना
जैसे प्रावधान लागू करने होंगे।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि नियमों की परिभाषा में सामान्य वर्ग के छात्रों और शिक्षकों को समान रूप से सुरक्षा नहीं दी गई। उनका कहना है कि अगर किसी सामान्य वर्ग के छात्र के साथ जातिगत आधार पर भेदभाव होता है, तो उसके लिए स्पष्ट कानूनी ढांचा नहीं दिखता। साथ ही, नियमों में झूठी या दुर्भावनापूर्ण शिकायतों पर दंड का प्रावधान न होने पर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिका में कहा गया है कि इससे संस्थानों में भय और असंतुलन का माहौल बन सकता है, जहां आरोप लगना ही सजा जैसा हो जाएगा।
UGC का पक्ष क्या है?
UGC और शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि ये नियम ऐतिहासिक रूप से वंचित वर्गों को संस्थागत सुरक्षा देने के लिए बनाए गए हैं। उनका तर्क है कि उच्च शिक्षा में समानता और गरिमा सुनिश्चित करना संविधान के मूल्यों के अनुरूप है।
अब आगे क्या?
सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई इस पूरे विवाद की दिशा तय कर सकती है। अदालत यह देखेगी कि क्या नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) के अनुरूप हैं या उनमें संशोधन की जरूरत है।
फिलहाल देशभर के छात्र, शिक्षक और शैक्षणिक संस्थान अदालत के रुख का इंतजार कर रहे हैं — क्योंकि यह फैसला तय करेगा कि कैंपस में ‘समानता’ की परिभाषा आखिर होगी क्या।
