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आप सो रहे होते हैं, लेकिन आपका स्मार्टफोन कंपनियों को दे रहा होता है आपकी जानकारी

Swaraj Times Desk: क्या आप रात में फोन साइलेंट पर रखकर निश्चिंत हो जाते हैं? अगर हां, तो यह जानकर आप चौंक सकते हैं कि जब आप गहरी नींद में होते हैं, तब भी आपका स्मार्टफोन “जाग” रहा होता है — और चुपचाप डेटा भेज और प्राप्त कर रहा होता है।

भले ही आप फोन इस्तेमाल नहीं कर रहे हों, लेकिन कई ऐप्स बैकग्राउंड में एक्टिव रहती हैं। ये ऐप्स इंटरनेट से जुड़ी रहती हैं और समय-समय पर डेटा ट्रांसमिट करती रहती हैं। कुछ डेटा जरूरी होता है, जैसे सिस्टम अपडेट, मैसेज सिंक या ईमेल नोटिफिकेशन। लेकिन इसके अलावा भी बहुत सा ऐसा डेटा शेयर होता है जिसकी आपको जानकारी तक नहीं होती।

कौन सा डेटा जाता है बाहर?

स्मार्टफोन से शेयर होने वाले डेटा में आपकी लोकेशन, डिवाइस की जानकारी, ऐप इस्तेमाल करने का पैटर्न, ब्राउज़िंग बिहेवियर और यहां तक कि आपकी एक्टिविटी टाइमिंग भी शामिल हो सकती है। यही जानकारी कंपनियां यूज़र प्रोफाइलिंग और टार्गेटेड विज्ञापनों के लिए इस्तेमाल करती हैं।

कई बार लोगों ने महसूस किया होगा कि जिस चीज़ की उन्होंने बात की, उसका विज्ञापन कुछ समय बाद फोन पर दिखने लगता है। यह संयोग नहीं, बल्कि डेटा ट्रैकिंग और एल्गोरिदम का खेल है।

क्यों है यह चिंता की बात?

हर ऐप को उतनी ही जानकारी चाहिए जितनी उसके काम के लिए जरूरी हो। लेकिन कई ऐप्स जरूरत से ज्यादा परमिशन लेकर बैकग्राउंड में डेटा इकट्ठा करती रहती हैं। अगर यह डेटा गलत हाथों में चला जाए तो आपकी डिजिटल प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है।


ऐसे रोकें अनचाहा डेटा शेयरिंग

ऐप परमिशन चेक करें – सेटिंग्स में जाकर देखें कौन-सी ऐप्स को लोकेशन, माइक्रोफोन, कैमरा और फाइल एक्सेस की अनुमति है।
अनयूज़्ड ऐप्स हटाएं – महीनों से इस्तेमाल नहीं किए गए ऐप्स डेटा खपत और ट्रैकिंग दोनों करते हैं।
बैकग्राउंड डेटा बंद करें – Android में “Background Data” और iPhone में “Background App Refresh” ऑफ कर सकते हैं।
लोकेशन ‘Always’ से हटाकर ‘While Using’ करें
रात में Airplane Mode या Wi-Fi/Data बंद करें
ऑटो-अपडेट को Wi-Fi तक सीमित रखें

छोटी-छोटी सेटिंग्स बदलकर आप अपनी डिजिटल प्राइवेसी पर बड़ा कंट्रोल पा सकते हैं।

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