• Wed. Mar 11th, 2026

4–6 फरवरी को होने वाली मौद्रिक नीति में 0.25% कटौती की उम्मीद — महंगाई और विकास के बीच RBI का संतुलन

Swaraj Times Desk: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की अगली मॉनिटरी पॉलिसी रिव्यू मीटिंग 4–6 फरवरी 2026 के बीच होने जा रही है और वित्तीय बाजारों में रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की कटौती की प्रबल संभावना जताई जा रही है। मौजूदा आर्थिक परिदृश्य में महंगाई नियंत्रित है और विकास दर (GDP ग्रोथ) को मजबूती की दिशा में बनाए रखने की चुनौती RBI के सामने है। इस संतुलन को साधने के लिए केंद्रीय बैंक रेपो रेट यानी कमर्शियल बैंकों के लिए दर को घटाने की तरफ सोच रहा है।

विश्लेषकों का कहना है कि अगर RBI 0.25 फीसदी कटौती करता है, तो रेपो रेट 5.50% से घटकर 5.25% हो सकता है। इसका सीधा असर बाजार में लिक्विडिटी (पैसे की उपलब्धता) पर पड़ेगा और कंज्यूमर खर्च व निवेश में बढ़ोतरी का मार्ग तैयार होगा।


होम लोन किस्तों पर सीधा असर

रेपो रेट में कटौती का सबसे स्पष्ट फायदा होम लोन लोनग्राहकों को मिलेगा। उदाहरण के तौर पर:

  • अगर आपका होम लोन 20 साल के लिए 50 लाख रुपये पर तय है,
  • और ब्याज दर 9% है,
  • तो 0.25% कटौती होने के बाद ब्याज दर लगभग 8.75% हो सकती है।

ऐसे में आपका हर महीने का EMI लगभग 800 रुपये तक कम हो जाएगा। कुल मिलाकर पूरा ब्याज भुगतान लगभग 1.9 लाख रुपये तक कम हो सकता है, अगर आप EMI समान रखते हैं। इसके अलावा, आप EMI को वैसा ही रखकर लोन की अवधि 10–12 महीने तक घटा भी सकते हैं, जिससे 4 लाख रुपये से अधिक की बचत संभव होती है।


RBI की पिछली दर कटौतियाँ

2025 के दौरान RBI ने अब तक 125 बेसिस पॉइंट (1.25%) की कटौती की है:

  • फरवरी और अप्रैल में 25 bps,
  • जून में 50 bps,
  • दिसंबर में फिर 25 bps की कटौती।
    अगस्त और अक्टूबर में दर में कोई बदलाव नहीं हुआ था।

क्या सभी मानते हैं कटौती की संभावना?

हालांकि कई अर्थशास्त्रियों को उम्मीद है कि दर में कटौती से आर्थिक गतिविधियों को बल मिलेगा, रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा है कि महंगाई में उभार की स्थिति को देखते हुए RBI पॉलिसी दरों को स्थिर रख सकता है। उनका तर्क है कि अगर महंगाई में वृद्धि जारी रही, तो मौद्रिक राहत देना जोखिम भरा हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *