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मोदी–इजरायल दोस्ती से फिलिस्तीन को राहत? भारत से शांति पहल की आस

Swaraj Times Desk: भारत दौरे पर आईं फिलिस्तीन की विदेश मंत्री डॉ. वार्सेन अगाबेकियन शाहीन ने पश्चिम एशिया के हालात पर खुलकर बात की और भारत से बड़ी कूटनीतिक भूमिका निभाने की उम्मीद जताई। एक विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन को जल्द ही आजादी और शांति मिलने की उम्मीद है, लेकिन मौजूदा इजरायली नेतृत्व से उन्हें भरोसा नहीं है।

डॉ. शाहीन ने साफ कहा कि जब तक बेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के प्रधानमंत्री हैं, तब तक किसी सकारात्मक समाधान की संभावना कम दिखाई देती है। उनके मुताबिक, नेतन्याहू पहले ही वेस्ट बैंक पर आधिकारिक कब्जे की बात कह चुके हैं, जिससे शांति प्रक्रिया को झटका लगा है। इसके उलट उन्होंने अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से उम्मीद जताई कि वे इजरायल पर दबाव डालकर किसी तरह की शांति पहल को आगे बढ़ा सकते हैं।


भारत से क्या उम्मीद?

भारत की भूमिका पर बोलते हुए फिलिस्तीनी मंत्री ने कहा कि भारत और फिलिस्तीन के संबंध ऐतिहासिक रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि भारत उन शुरुआती देशों में था जिसने फिलिस्तीन को मान्यता दी थी।

उनका कहना था कि भारत की खासियत यह है कि वह इजरायल और फिलिस्तीन दोनों का दोस्त है। “एक दोस्त ही दूसरे दोस्त को समझाकर तीसरे की मदद कर सकता है,” उन्होंने कहा। डॉ. शाहीन को उम्मीद है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल से करीबी संबंधों का इस्तेमाल शांति संवाद को बढ़ाने में किया जा सकता है।


अरब देशों से समन्वय

भारत में अरब देशों के मंत्रियों के साथ बैठक को उन्होंने समर्थन जुटाने का प्रयास बताया। उनके मुताबिक, गाजा के पुनर्निर्माण और भविष्य की राजनीतिक संरचना पर व्यापक चर्चा जरूरी है और भारत जैसे प्रभावशाली देशों का सहयोग अहम हो सकता है।


हमास पर रुख स्पष्ट

हमास को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि फिलिस्तीन की आधिकारिक नीति अहिंसा और राजनीतिक समाधान की है। उन्होंने माना कि हर फिलिस्तीनी हमास का समर्थक नहीं है। अगर हमास को मुख्यधारा की राजनीति में आना है तो उसे पीएलओ (Palestine Liberation Organization) के ढांचे को स्वीकार करना होगा, जो शांति प्रक्रिया का समर्थक है।


भारत की भूमिका क्यों अहम?

डॉ. शाहीन ने कहा कि भारत हमेशा लोकतंत्र, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय कानून का समर्थक रहा है। ऐसे में भारत की मध्यस्थ भूमिका फिलिस्तीन के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है।

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