Delhi News: सड़क से कूड़ाघर तक मिशन क्लीन-दिल्ली — फंडिंग, मॉनिटरिंग और टेक्नोलॉजी से बदलेगी तस्वीर
Swaraj Times Desk: राजधानी को साफ-सुथरा और धूल-मुक्त बनाने की दिशा में सरकार ने बड़ा वित्तीय फैसला लिया है। मुख्यमंत्री Rekha Gupta ने Municipal Corporation of Delhi (MCD) को 500 करोड़ रुपये की एकमुश्त सहायता देने की घोषणा की है। लक्ष्य साफ है—सफाई तंत्र को मज़बूत करना, सड़कों की त्वरित मरम्मत और धूल से होने वाले प्रदूषण पर तेज़ नियंत्रण।
दिल्ली सचिवालय में हुई उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में शहरी सेवाओं की कमियों, ठेकेदारों के बकाये और कचरा ढुलाई में आ रही बाधाओं पर विस्तार से चर्चा हुई। निर्णय हुआ कि इस राशि का इस्तेमाल सबसे पहले कचरा प्रबंधन कंपनियों के लंबित भुगतानों के निपटारे में किया जाएगा, ताकि सफाई कार्य बिना रुकावट जारी रहे। इसके अलावा उन इलाकों से कूड़ा हटाने पर फोकस होगा जहां नियमित ठेकेदार तैनात नहीं हैं।
सड़क धूल कम करने के लिए गड्ढों की पैच-रिपेयर, टूटी सतहों की मरम्मत और मैकेनिकल स्वीपिंग को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार का मानना है कि सड़क की उखड़ी परतें और खुले मलबे से उड़ने वाली धूल वायु गुणवत्ता को सीधे प्रभावित करती है। इसी कड़ी में आधुनिक सफाई मशीनें खरीदने और बड़े कूड़ा-ढुलाई बेड़े को अपग्रेड करने की योजना भी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने यह भी संकेत दिया कि आगे चलकर MCD को हर साल 300 करोड़ रुपये की नियमित सहायता दी जा सकती है, ताकि सफाई तंत्र टिकाऊ बने और रखरखाव में व्यवधान न आए। हालांकि, खर्च पर कड़ी निगरानी अनिवार्य रहेगी—हर मद के लिए प्रगति रिपोर्ट और उपयोगिता प्रमाणपत्र जमा करने होंगे।
कचरे से ऊर्जा बनाने वाले संयंत्रों के विस्तार और अपग्रेडेशन पर भी जोर दिया गया है। हर विधानसभा क्षेत्र में हरित कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए आधुनिक मशीनें लगाने का प्रस्ताव है, जिससे लैंडफिल पर दबाव घटे और दुर्गंध/धूल का फैलाव कम हो।
दिल्ली पहले से वायु प्रदूषण की चुनौती झेल रही है, जहां सड़क धूल और बिखरा कचरा प्रमुख कारक माने जाते हैं। ऐसे में यह फंडिंग पैकेज सिर्फ सफाई अभियान नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और शहरी जीवन-गुणवत्ता सुधारने की व्यापक रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
