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UGC New Rules: UGC नियमों पर रोक के बीच राज्यसभा में सामाजिक न्याय बनाम सत्ता की राजनीति पर गरमाई बहस

Swaraj Times Desk: UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की अंतरिम रोक के बीच राज्यसभा में सामाजिक न्याय का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सांसद संजय यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ओबीसी हितों की बात भाषणों में तो होती है, लेकिन नीतियों और नियुक्तियों में उसका असर दिखाई नहीं देता।

UGC नियमों पर उठे सवाल

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नए UGC नियमों पर फिलहाल रोक लगाए जाने के बाद विपक्ष ने इसे सामाजिक प्रतिनिधित्व से जोड़ा। संजय यादव ने कहा कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षित पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। उनका आरोप था कि “उपयुक्त उम्मीदवार नहीं मिलने” का तर्क देकर ओबीसी वर्ग के पद भरे नहीं जा रहे।

“देश में हर दूसरा व्यक्ति ओबीसी”

राज्यसभा में बोलते हुए उन्होंने दावा किया कि देश की बड़ी आबादी अन्य पिछड़ा वर्ग से आती है, फिर भी नीति-निर्माण और उच्च पदों पर उनकी हिस्सेदारी बहुत कम है। उन्होंने कहा कि मंडल आयोग की सिफारिशें लागू हुए दशकों बीत चुके हैं, लेकिन जमीनी बदलाव अपेक्षित स्तर पर नहीं दिख रहे।

सामाजिक न्याय बनाम राजनीतिक नैरेटिव

संजय यादव ने तीखा बयान देते हुए कहा, “अगर हम ओबीसी की बात करें तो हमें जातिवादी कहा जाता है, लेकिन जो लोग हमारे अधिकार छीनते हैं उन्हें राष्ट्रवादी बताया जाता है।” इस टिप्पणी के बाद सदन में कुछ देर तक हलचल भी रही।

सरकार पर दोहरे मापदंड का आरोप

RJD सांसद ने यह भी आरोप लगाया कि चुनावी भाषणों और प्रचार में ओबीसी समुदाय को आगे रखा जाता है, लेकिन निर्णय लेने वाली संस्थाओं में उनकी भागीदारी सीमित रहती है। उन्होंने केंद्र से स्पष्ट जवाब मांगा कि खाली पड़े आरक्षित पद कब तक भरे जाएंगे और सामाजिक न्याय के दावों को वास्तविक नीति में कैसे बदला जाएगा।

बहस अभी जारी

UGC नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक ने शिक्षा व्यवस्था और आरक्षण नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सरकार की ओर से अभी विस्तृत प्रतिक्रिया आनी बाकी है, लेकिन संसद में उठे इस मुद्दे ने यह साफ कर दिया है कि सामाजिक प्रतिनिधित्व आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक विषय बना रहेगा।

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