Iran-US Nuclear Talks: मस्कट वार्ता से पहले तेहरान का साफ रुख, सिद्धांतों पर अडिग रहने का ऐलान
Swaraj Times Desk: ईरान और अमेरिका के बीच नई परमाणु वार्ता शुरू होने से ठीक पहले तेहरान ने अपना रुख बेहद स्पष्ट कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ऐलान किया है कि ईरान “सिद्धांतों पर आधारित कूटनीति” अपनाएगा और किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के प्रतिनिधि ओमान की राजधानी मस्कट में नए दौर की परमाणु बातचीत शुरू करने वाले हैं।
अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान “खुली आंखों” के साथ बातचीत की मेज पर जा रहा है और बीते एक साल की घटनाओं को ध्यान में रखकर फैसले करेगा। उनका कहना था कि बराबरी, आपसी सम्मान और पारस्परिक हित किसी भी टिकाऊ समझौते की बुनियादी शर्तें हैं। उन्होंने साफ किया कि ईरान अपने अधिकारों से पीछे हटने वाला नहीं है।
पृष्ठभूमि में बढ़ता तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे को लेकर तनाव नया नहीं है, लेकिन पिछले साल हालात और जटिल हो गए। पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष और क्षेत्रीय अस्थिरता ने कूटनीतिक माहौल को और संवेदनशील बना दिया है। ईरान चाहता है कि बातचीत सिर्फ उसके परमाणु कार्यक्रम और उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों तक सीमित रहे।
दूसरी ओर, अमेरिका इस दायरे को व्यापक बनाना चाहता है। वॉशिंगटन का मानना है कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय गतिविधियों पर भी चर्चा होनी चाहिए। यही मतभेद वार्ता की राह को कठिन बना रहे हैं।
समझौते की राह कितनी कठिन?
विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों पक्षों के बीच विश्वास की कमी सबसे बड़ी बाधा है। पहले हुए समझौतों के टूटने और आरोप-प्रत्यारोप के इतिहास ने हालात को जटिल बना दिया है। फिर भी, बातचीत की शुरुआत को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, क्योंकि यह कम से कम संवाद के दरवाज़े खुले रहने का संकेत देता है।
ईरान का सख्त रुख यह बताता है कि वह किसी भी समझौते को अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप ही स्वीकार करेगा। वहीं अमेरिका क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक स्थिरता के नजरिए से व्यापक शर्तों की मांग कर रहा है। अब सबकी नजर मस्कट में होने वाली इन वार्ताओं पर है — क्या कूटनीति टकराव को टाल पाएगी या परमाणु डील पर फिर नई जंग छिड़ेगी?
