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Bhaodhi News: अमेरिका की ड्यूटी नरम पड़ते ही ऑर्डर बढ़े, बुनकरों के घरों में लौटी रौनक

Swaraj Times Desk: अमेरिका द्वारा आयात शुल्क घटाए जाने की खबर ने उत्तर प्रदेश के कालीन उद्योग के दिल — Bhadohi — में नई जान फूंक दी है। लंबे समय से ऊंचे टैरिफ के दबाव में जूझ रहे निर्यातकों का कहना है कि अब ऑर्डर फिर से रफ्तार पकड़ रहे हैं और उत्पादन इकाइयों में काम बढ़ने लगा है। उद्योग जगत के प्रतिनिधि इस बदलाव का श्रेय प्रधानमंत्री Narendra Modi की कूटनीतिक पहल और वाणिज्य मंत्रालय की सक्रियता को दे रहे हैं।

कुछ महीनों पहले तक स्थिति उलट थी। अमेरिकी बाजार में अतिरिक्त शुल्क लगने से लागत बढ़ गई थी, ऑर्डर टल रहे थे और कई इकाइयों में काम घटा दिया गया था। निर्यातकों के मुताबिक, 18% के स्तर पर टैरिफ आने के बाद खरीदारों का भरोसा लौटा है। अगर आगे कुछ श्रेणियों में और रियायत मिलती है, तो यह सेक्टर के लिए बड़ा बूस्ट साबित हो सकता है।

कारपेट एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल से जुड़े उद्यमियों का कहना है कि अमेरिका भदोही के कालीनों का प्रमुख गंतव्य रहा है। ड्यूटी नरम पड़ने से कीमतें प्रतिस्पर्धी बनी हैं, जिससे नए ऑर्डर मिल रहे हैं। एक निर्यातक ने बताया कि “वर्कशॉप में करघे फिर से फुल कैपेसिटी पर चलने लगे हैं, और जिन कारीगरों की शिफ्ट घटाई गई थी, उन्हें दोबारा बुलाया जा रहा है।”

स्थानीय बुनकरों पर इसका सीधा असर दिख रहा है। ग्रामीण इलाकों में घर-घर लगे करघों पर काम बढ़ने से आय का प्रवाह सुधर रहा है। उद्योग से जुड़े संगठनों का मानना है कि स्थिर टैरिफ व्यवस्था और लॉजिस्टिक्स सपोर्ट के साथ यह सेक्टर रोजगार के बड़े अवसर पैदा कर सकता है।

निर्यातकों ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा के दौर में डिज़ाइन, क्वालिटी और समय पर डिलीवरी अहम हैं। वे सरकार से कच्चे माल की उपलब्धता, आसान क्रेडिट और निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं में निरंतरता की उम्मीद कर रहे हैं।

कुल मिलाकर, टैरिफ में राहत ने ‘कालीन सिटी’ में उम्मीद की नई बुनाई कर दी है। कारोबारियों का विश्वास है कि यदि व्यापारिक माहौल स्थिर रहा, तो भदोही का हस्तनिर्मित कालीन उद्योग फिर से अपने स्वर्णिम दौर की ओर बढ़ सकता है।

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