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विपक्ष का आरोप — बोलने नहीं दिया तो सदन में लाएंगे बड़ा संवैधानिक कदम

Swaraj Times Desk: संसद का बजट सत्र शुरू होते ही सियासी पारा चढ़ गया है। विपक्षी दल अब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की रणनीति बना रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इस मुद्दे पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेताओं के बीच अहम बैठक हुई है।

विपक्ष का आरोप है कि उन्हें सदन में अपनी बात रखने का पर्याप्त मौका नहीं दिया जा रहा। खास तौर पर राहुल गांधी सांसदों के निलंबन और महिला सांसदों से जुड़े कथित विवादों पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली। इसी के विरोध में सोमवार को लोकसभा में जमकर हंगामा हुआ, जिसके बाद कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी।

विपक्षी नेताओं का कहना है कि अगर सदन में चर्चा और अभिव्यक्ति का अधिकार सीमित किया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। उनका मानना है कि लोकसभा अध्यक्ष की भूमिका निष्पक्ष होनी चाहिए, लेकिन मौजूदा हालात में ऐसा दिखाई नहीं दे रहा। इसी कारण विपक्ष अब अविश्वास प्रस्ताव जैसे बड़े संसदीय कदम पर विचार कर रहा है।

इस बीच विपक्ष ने असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा से जुड़े एक कथित विवाद को भी उठाया है। कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने आरोप लगाया कि एक आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया, जिसे बाद में हटा लिया गया। उन्होंने मांग की कि इस मामले में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और सत्तारूढ़ दल के शीर्ष नेतृत्व को हस्तक्षेप कर कार्रवाई करनी चाहिए।

संसदीय परंपराओं में लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव एक गंभीर कदम माना जाता है और यह बहुत कम देखने को मिलता है। ऐसे प्रस्ताव का उद्देश्य सदन की कार्यवाही के संचालन को लेकर असंतोष दर्ज कराना होता है। हालांकि, इसके सफल होने की संभावना संख्या बल पर निर्भर करती है।

फिलहाल यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर टकराव और तेज हो सकता है। विपक्ष जहां इसे लोकतंत्र की रक्षा का सवाल बता रहा है, वहीं सत्तापक्ष इसे राजनीतिक नाटक करार दे सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या विपक्ष औपचारिक रूप से प्रस्ताव पेश करता है और सदन की कार्यवाही किस दिशा में आगे बढ़ती है।

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