Amit Shah News: बस्तर पंडुम में संस्कृति, सुरक्षा और विकास पर जोर; नक्सलवाद के अंत की समय सीमा दोहराई
Swaraj Times Desk: छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक ऐसा संदेश दिया, जिसने सुरक्षा, संस्कृति और विकास—तीनों को एक सूत्र में पिरो दिया। जगदलपुर में आयोजित ‘बस्तर पंडुम’ उत्सव के समापन समारोह में उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी गोलियों की आवाज सुनाई देती थी, वहां अब स्कूलों की घंटियाँ बज रही हैं। यह बयान बस्तर के बदलते हालात की प्रतीकात्मक तस्वीर पेश करता है।
शाह ने बस्तर की जनजातीय संस्कृति को “भारत का आभूषण” बताते हुए कहा कि यहां की परंपराएं सदियों से संजोकर रखी गई हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर पंडुम 2026 में हजारों लोक कलाकारों ने भाग लेकर 12 अलग-अलग विधाओं में अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में विजेता कलाकारों को सम्मानित करते हुए उन्होंने घोषणा की कि शीर्ष प्रतिभागियों को दिल्ली में राष्ट्रपति भवन आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे अपनी कला का प्रदर्शन कर सकेंगे।
संस्कृति से विकास तक का संदेश
शाह ने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को सहेजना उतना ही जरूरी है जितना यहां शांति और विकास लाना। उन्होंने केंद्र सरकार की जनजातीय कल्याण योजनाओं—जैसे आदिवासी परंपराओं के संरक्षण और आजीविका से जुड़ी पहलों—का उल्लेख किया। उनके अनुसार, विकास की असली सफलता तब है जब वह स्थानीय संस्कृति और परंपरा के साथ तालमेल बैठाकर आगे बढ़े।
नक्सलवाद पर सख्त रुख
गृह मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार की लड़ाई किसी समुदाय से नहीं, बल्कि हिंसा की विचारधारा से है। उन्होंने दोहराया कि सुरक्षा बलों की कार्रवाई और पुनर्वास नीति के संयुक्त प्रयास से नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में तेज प्रगति हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मसमर्पण करने वालों को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर दिए जा रहे हैं।
बुनियादी सुविधाओं का विस्तार
शाह ने कहा कि जिन गांवों में पहले विकास नहीं पहुंच पाया था, वहां अब सड़क, मोबाइल टावर, राशन वितरण, पेयजल, आधार और आयुष्मान कार्ड जैसी सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने बताया कि कई प्रभावित गांवों में स्कूल दोबारा खुले हैं, जिससे बच्चों की शिक्षा पटरी पर लौट रही है।
उद्योग, सिंचाई और पर्यटन पर फोकस
उन्होंने बस्तर में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने, सिंचाई परियोजनाओं के विस्तार और पर्यटन को बढ़ावा देने की योजनाओं का भी जिक्र किया। बस्तर को प्राकृतिक सौंदर्य, जनजातीय संस्कृति और इको-टूरिज्म के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की बात कही गई।
कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भी बस्तर पंडुम को “पहचान का उत्सव” बताया और कहा कि बस्तर अब संभावनाओं की धरती बन रहा है। उनके अनुसार, पहले जहां नक्सल हिंसा की खबरें सुर्खियों में रहती थीं, अब संस्कृति और विकास की चर्चा हो रही है।
कुल मिलाकर, बस्तर पंडुम का मंच सुरक्षा और संस्कृति के संगम का प्रतीक बनकर उभरा—जहां सरकार ने विकास, परंपरा और शांति को साथ लेकर चलने का संदेश दिया।
