Shankaracharya Controversy: शंकराचार्य के बयान पर सियासत तेज, लखनऊ से अखिलेश यादव का सीधा हमला
Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में शंकराचार्य के बयान को लेकर घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आड़े हाथों लिया। राजधानी लखनऊ में पार्टी कार्यालय पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए अखिलेश ने कहा कि वे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बयान से “100 प्रतिशत सहमत” हैं।
“इतना खराब व्यवहार कैसे?”
अखिलेश यादव ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा, “कोई मुख्यमंत्री, जो खुद को योगी कहते हैं, क्या शंकराचार्य के बारे में इस तरह की टिप्पणी कर सकते हैं? क्या इतना खराब व्यवहार होना चाहिए?” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में बैठे लोगों को धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के प्रति संयम और सम्मान दिखाना चाहिए। अखिलेश ने कहा कि शंकराचार्य देश की आस्था और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए उनके साथ संवाद और मर्यादा दोनों जरूरी हैं।
सियासत में नई हलचल
इसी कार्यक्रम में एक और बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। अखिलेश यादव ने उन्हें औपचारिक रूप से पार्टी की सदस्यता दिलाई। सिद्दीकी के साथ उनकी पत्नी और सात अन्य नेताओं ने भी सपा में शामिल होकर प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी।
नसीमुद्दीन सिद्दीकी पहले बहुजन समाज पार्टी और बाद में कांग्रेस में रहे। हाल ही में उन्होंने कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। सपा में शामिल होते हुए उन्होंने कहा कि वे हमेशा से मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव की राजनीति से प्रभावित रहे हैं।
सियासी तापमान और तेज
शंकराचार्य विवाद और सिद्दीकी की एंट्री ने यूपी की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। एक ओर भाजपा सरकार विकास और सुशासन का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर विपक्ष सरकार के रवैये और बयानों पर सवाल उठा रहा है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है, खासकर तब जब प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। फिलहाल, शंकराचार्य के बयान ने सियासत की दिशा बदल दी है और दोनों दलों के बीच शब्दों की जंग खुलकर सामने आ गई है।
