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Pinaka Rocket System: HIMARS को टक्कर देने वाला पिनाका बना ग्लोबल गेमचेंजर, मेगा डिफेंस डील से बदलेगी रणनीतिक तस्वीर

Swaraj Times Desk: भारत अब केवल हथियारों का खरीदार नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में उभरता हुआ निर्यातक बन चुका है। एक तरफ भारत फ्रांस से 114 अत्याधुनिक Rafale fighter jet खरीदने की दिशा में बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर फ्रांस भारत के स्वदेशी Pinaka Multi Barrel Rocket Launcher सिस्टम में गंभीर रुचि दिखा रहा है। यह रक्षा सहयोग केवल सौदे से आगे बढ़कर रणनीतिक साझेदारी का संकेत देता है।

पिनाका: देसी ताकत, वैश्विक पहचान

पिनाका एक मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम (MBRL) है, जिसे डीआरडीओ ने स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। इसकी तुलना अमेरिकी M142 HIMARS और रूसी Tornado-S से की जाती है।

पिनाका की सबसे बड़ी ताकत इसकी तेज फायरिंग क्षमता है। एक लॉन्चर मात्र 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है, जबकि एक पूरी बैटरी एक मिनट में 72 रॉकेट छोड़ सकती है। यह लगभग एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को तबाह करने की क्षमता रखता है। “शूट एंड स्कूट” तकनीक के कारण यह फायरिंग के बाद तुरंत अपनी जगह बदल सकता है, जिससे दुश्मन के लिए इसे निशाना बनाना मुश्किल हो जाता है।

रेंज और कीमत में बड़ा अंतर

पिनाका का मौजूदा वर्जन 75–90 किलोमीटर तक मार करता है, जबकि एमके-3 वर्जन की रेंज 120–130 किलोमीटर तक है। एमके-4 पर काम जारी है, जिसकी संभावित रेंज 300 किलोमीटर तक बताई जा रही है।

जहां HIMARS की कीमत लगभग 19.5 करोड़ रुपये प्रति यूनिट बताई जाती है, वहीं पिनाका की कीमत करीब 2.3 करोड़ रुपये है। यानी लागत में भारी अंतर। यही वजह है कि फ्रांस इसे अपने पुराने एम270 सिस्टम के विकल्प के तौर पर देख रहा है।

फ्रांस की दिलचस्पी क्यों?

हाल ही में फ्रांस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भारत आकर पिनाका का मूल्यांकन किया। फ्रांस अपनी आर्टिलरी क्षमता को अपग्रेड करना चाहता है, लेकिन अपने नए सिस्टम को विकसित करने में समय लगेगा। ऐसे में पिनाका एक किफायती और भरोसेमंद विकल्प बनकर उभरा है।

अगर यह डील फाइनल होती है, तो यह भारत के रक्षा निर्यात के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि होगी। फ्रांस जैसे विकसित और नाटो सदस्य देश का भारतीय सिस्टम पर भरोसा करना, भारत की तकनीकी क्षमता की अंतरराष्ट्रीय मान्यता होगी।

क्या HIMARS पर भारी पड़ेगा पिनाका?

हालांकि HIMARS की रेंज 300–499 किलोमीटर तक बताई जाती है, लेकिन पिनाका की रैपिड फायर क्षमता और मल्टी-डायरेक्शनल अटैक इसे खास बनाती है। युद्ध रणनीति में कई बार फायर पावर और लागत-प्रभावशीलता ज्यादा अहम होती है।

भारत की नई रक्षा रणनीति

यह सौदा केवल हथियारों का लेन-देन नहीं, बल्कि “रक्षा रिवर्स डिप्लोमेसी” का संकेत है—जहां भारत आयात के साथ-साथ निर्यात में भी संतुलन बना रहा है।

पिनाका अब केवल भारतीय सेना की ताकत नहीं, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में भारत की पहचान बनता जा रहा है। अगर फ्रांस के साथ यह समझौता होता है, तो यह “मेक इन इंडिया” को नई ऊंचाई देगा और भारत को रक्षा तकनीक के क्षेत्र में अग्रणी राष्ट्रों की कतार में खड़ा करेगा।

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