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Iran-Israel War के बीच ईरान ने अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बिना शर्त सरेंडर की मांग को खारिज कर दिया। साथ ही पड़ोसी खाड़ी देशों पर हुए हमलों को लेकर माफी भी मांगी।

Swaraj Times Desk: मध्य पूर्व में जारी ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच एक बड़ा राजनीतिक बयान सामने आया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने अमेरिका की ओर से की गई “बिना शर्त आत्मसमर्पण” की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि ईरान कभी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है और अमेरिका के ऐसे सपने “कब्र में चले जाएंगे”।

दरअसल हाल के दिनों में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद तनाव काफी बढ़ गया है। इसके जवाब में ईरान ने भी कई मिसाइल हमले किए थे, जिनमें कुछ हमले उन खाड़ी देशों के ठिकानों पर हुए जहां अमेरिका के सैन्य अड्डे मौजूद हैं।

हालांकि इन हमलों के बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पड़ोसी देशों से माफी मांगते हुए कहा कि उनका इन देशों के साथ दुश्मनी बढ़ाने का कोई इरादा नहीं है। एक टीवी संबोधन में उन्होंने कहा कि ईरान की अंतरिम नेतृत्व परिषद ने पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का फैसला किया है ताकि क्षेत्र में और अधिक तनाव न बढ़े।

उन्होंने कहा कि ईरान फिलहाल मिसाइल लॉन्च और सैन्य कार्रवाई को रोकने के लिए तैयार है, लेकिन अगर किसी भी देश की तरफ से ईरान पर हमला किया गया तो उसका जवाब देना देश का अधिकार होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि यह फैसला क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।

दूसरी ओर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान के साथ किसी भी तरह की बातचीत तभी संभव होगी जब वह बिना शर्त आत्मसमर्पण करे। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान में नया नेतृत्व उभरता है तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश वहां की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने में मदद करेंगे।

ट्रंप के इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए ईरान के राष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी उम्मीदें पूरी तरह अवास्तविक हैं। उन्होंने कहा कि ईरान किसी भी कीमत पर अपनी संप्रभुता और सम्मान से समझौता नहीं करेगा।

इस बीच ईरान और इजरायल के बीच जारी सैन्य टकराव ने पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव बढ़ा दिया है। मिसाइल हमलों और हवाई हमलों के कारण कई इलाकों में भारी नुकसान हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संघर्ष में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौत और हजारों लोग घायल हुए हैं।

इस युद्ध का असर वैश्विक बाजारों पर भी देखने को मिला है। तेल की कीमतों में तेजी आई है और यूरोप तथा अमेरिका के शेयर बाजारों में भी गिरावट दर्ज की गई है।

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