LPG Crisis India: ईरान-इजरायल तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज संकट के कारण दुनिया भर में LPG की कीमतें बढ़ रही हैं। भारत के कई शहरों में गैस सिलेंडर की कमी से होटल-रेस्टोरेंट कारोबार प्रभावित हो रहा है।
Swaraj Times Desk: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े संघर्ष का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजारों के साथ-साथ भारत पर भी दिखाई देने लगा है। एलपीजी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी और सप्लाई में कमी की खबरों के बीच देश के कई शहरों में गैस सिलेंडर की किल्लत सामने आ रही है। इससे होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान से जुड़े युद्ध और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मूज क्षेत्र में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय गैस सप्लाई प्रभावित हो रही है। इस क्षेत्र से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल और गैस की आपूर्ति करता है। जहाजों की आवाजाही में बाधा आने और शिपिंग लागत बढ़ने के कारण ऊर्जा की कीमतों में तेजी देखने को मिल रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी गैस और तेल के दाम बढ़ने लगे हैं। यूरोप में नॉर्वे की तरफ से महंगी गैस सप्लाई की जा रही है, जबकि अमेरिका और अन्य देशों को कनाडा से तेल और गैस की आपूर्ति बढ़ाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा चला तो दुनिया भर में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
इधर भारत में भी गैस सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया है कि ईरान से जुड़े युद्ध के कारण देशभर में एलपीजी की भारी किल्लत हो गई है। उन्होंने कहा कि गैस उत्पादन में कमी आने से होटल और रेस्टोरेंट उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है।
केजरीवाल के अनुसार, रेस्टोरेंट और होटल गैस सिलेंडर को लंबे समय तक स्टोर नहीं कर सकते, क्योंकि उन्हें रोजाना सप्लाई की जरूरत होती है। उन्होंने दावा किया कि मुंबई में करीब 30 प्रतिशत से ज्यादा रेस्टोरेंट गैस की कमी के कारण बंद हो चुके हैं।
इस संकट के बीच अयोध्या में राम मंदिर के पास स्थित अमावा मंदिर की राम रसोई ने भी वैकल्पिक व्यवस्था तैयार कर ली है। मंदिर प्रशासन ने बताया कि यदि एलपीजी सप्लाई में कमी आती है तो रसोई में इलेक्ट्रिक कुकर, राइस कुकर, कोयला और लकड़ी जैसे विकल्पों का इस्तेमाल किया जाएगा।
राम रसोई में प्रतिदिन करीब 10 हजार से 20 हजार भक्तों के लिए भोजन तैयार किया जाता है। हालांकि गैस की कमी के कारण फिलहाल भंडारे के समय में भी बदलाव किया गया है ताकि भोजन वितरण प्रभावित न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव जल्द कम नहीं हुआ तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और महंगाई पर लंबे समय तक देखने को मिल सकता है।
