LPG Crisis India: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत ने LPG संकट से निपटने के लिए अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और रूस से गैस आयात बढ़ाया। जानें सरकार की नई रणनीति।
Swaraj Times Desk: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को गहरे संकट में डाल दिया है और इसका असर भारत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। एलपीजी गैस की कमी ने कई शहरों में आम लोगों से लेकर होटल, रेस्टोरेंट और छोटे उद्योगों तक को प्रभावित किया है। इस चुनौती से निपटने के लिए अब भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारत की ऊर्जा सप्लाई पर पहले ही पड़ चुका है। खासकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के प्रभावित होने से गैस आपूर्ति में बाधा आई है, क्योंकि भारत का लगभग 90 प्रतिशत एलपीजी आयात इसी रास्ते से होता रहा है।
अमेरिका से LPG आयात बढ़ाया
सरकार ने इस संकट से निपटने के लिए वैकल्पिक रास्तों की तलाश शुरू कर दी है। अब भारत अमेरिका से बड़े पैमाने पर एलपीजी आयात कर रहा है, ताकि सप्लाई में आई कमी को पूरा किया जा सके। यह कदम आपूर्ति को स्थिर रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
ऑस्ट्रेलिया और रूस से LNG सप्लाई
इसके साथ ही भारत ने एलएनजी (LNG) की आपूर्ति के लिए ऑस्ट्रेलिया और रूस जैसे देशों के साथ भी समझौते बढ़ाए हैं। इन देशों से गैस आयात करके भारत अपने ऊर्जा स्रोतों को विविध बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि भविष्य में किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके।
संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं
हालांकि सरकार के इन प्रयासों के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। कई जगहों पर अभी भी एलपीजी सिलेंडर के लिए लोगों को लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। बाजार में दबाव बना हुआ है और मांग के मुकाबले सप्लाई कम पड़ रही है।
सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे घबराहट में अनावश्यक बुकिंग न करें और होम डिलीवरी का इंतजार करें। डिजिटल बुकिंग में भी बढ़ोतरी देखी गई है, जहां करीब 93 प्रतिशत उपभोक्ता अब ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमले बढ़े
इस पूरे संकट की एक बड़ी वजह यह भी है कि अब मिडिल ईस्ट संघर्ष का केंद्र ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर बन गया है। तेल और गैस प्लांट्स पर सीधे हमले होने से वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में उछाल और आपूर्ति में अनिश्चितता बढ़ी है।
क्या मिलेगा स्थायी समाधान?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह नई रणनीति अल्पकालिक राहत जरूर दे सकती है, लेकिन दीर्घकाल में ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों जैसे रिन्यूएबल एनर्जी पर ज्यादा ध्यान देना जरूरी होगा।
फिलहाल, सरकार के ये कदम एलपीजी संकट को नियंत्रित करने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वैश्विक हालात किस दिशा में जाते हैं और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर इसका कितना असर पड़ता है।
