नाम जुड़वाने की दौड़ में पिछड़ी पार्टियां, आगे निकले आम वोटर—UP की राजनीति के लिए बड़ा संदेश
Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत 6 जनवरी 2026 को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद आपत्तियों और दावों की प्रक्रिया तेज हो गई है. इस बीच मुख्य निर्वाचन अधिकारी, उत्तर प्रदेश द्वारा प्रतिदिन जारी किए जा रहे आंकड़े एक बेहद दिलचस्प और राजनीतिक रूप से अहम ट्रेंड की ओर इशारा कर रहे हैं. आंकड़ों से साफ है कि मतदाता अब नाम जोड़ने के लिए राजनीतिक दलों पर निर्भर नहीं रहना चाहते, बल्कि खुद आगे आकर प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं.
राजनीतिक दलों की सीमित भागीदारी
7 से 11 जनवरी 2026 के बीच जारी आंकड़ों के मुताबिक, राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए (Booth Level Agents) के जरिए नाम जोड़ने के दावे अपेक्षाकृत कम रहे. 7 जनवरी को केवल 128 दावे दर्ज हुए, जिनमें सबसे ज्यादा भारतीय जनता पार्टी से जुड़े थे. इसके बाद बहुजन समाज पार्टी और समाजवादी पार्टी का नंबर आया, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का योगदान लगभग नगण्य रहा.
आने वाले दिनों में यह संख्या जरूर बढ़ी, लेकिन रफ्तार काफी धीमी रही. 11 जनवरी तक सभी राजनीतिक दलों के जरिए कुल 1,919 दावे दर्ज किए गए. खास बात यह रही कि किसी भी दिन किसी भी दल ने नाम हटाने का दावा दर्ज नहीं कराया, जबकि सार्वजनिक मंचों पर फर्जी मतदाताओं को लेकर आरोप-प्रत्यारोप लगातार चलते रहे.
मतदाताओं का खुद पर बढ़ता भरोसा
इन आंकड़ों से कहीं ज्यादा चौंकाने वाला ट्रेंड आम मतदाताओं द्वारा सीधे आवेदन करने का रहा. 8 जनवरी को जहां 30,663 आवेदन सीधे मतदाताओं से आए, वहीं 9 जनवरी को यह संख्या बढ़कर 32,290 हो गई. असली उछाल 10 जनवरी को देखने को मिला, जब 92,456 लोगों ने खुद आगे आकर नाम जोड़ने के लिए आवेदन किया.
11 जनवरी को यह आंकड़ा और भी चौंकाने वाला रहा—एक ही दिन में 1,26,984 सीधे आवेदन दर्ज हुए. यह साफ संकेत है कि मतदाता अब दलों के जरिए नहीं, बल्कि स्वयं अपनी लोकतांत्रिक जिम्मेदारी निभाना चाहते हैं.
राजनीतिक मायने क्या हैं?
वरिष्ठ पत्रकारों और चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि वोटर भले ही चुनाव में किसी पार्टी को समर्थन दे, लेकिन मतदाता सूची जैसे बुनियादी अधिकारों के मामले में वह किसी दल पर भरोसा नहीं करता. यह ट्रेंड आने वाले चुनावों से पहले सभी दलों के लिए चेतावनी भी है और संदेश भी—मतदाता अब ज्यादा जागरूक, स्वतंत्र और आत्मनिर्भर हो चुका है.
