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Swaraj Times Desk: अयोध्या/बारामती, 28 जनवरी 2026: महाराष्ट्र की राजनीति को आज एक बहुत बड़ा झटका लगा है। बारामती में बुधवार सुबह हुए विमान हादसे में राज्य के उपमुख्यमंत्री और एनसीपी (अजित पवार गुट) के वरिष्ठ नेता अजित पवार की मौत हो गई। यह दुर्घटना उस समय सामने आई जब वे जिला परिषद और पंचायत समिति चुनाव प्रचार के तहत कई जनसभाओं को संबोधित करने वाले थे। हादसे की खबर मिलते ही प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और राजनीतिक जगत में तनाव फैल गया और पूरा देश इस दुखद समाचार के साथ जुड़ गया।


परिवार के सदस्य — किन्हें पीछे छोड़ा?

अजित पवार का परिवार राजनीतिक और सामाजिक जुड़ावों से गहरा था। उनके पीछे कई सदस्य हैं जिनकी ज़िंदगी इस हादसे से प्रभावित हुई है:

  • पत्नी: सुनेत्रा पवार — चुनावी रैलियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में अक्सर उनके साथ दिखीं।
  • बड़े बेटे: पार्थ पवार — 2019 में मावल से लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं।
  • छोटे बेटे: जय पवार — वर्तमान में व्यापार में सक्रिय हैं।
  • भाई: श्रीनिवास पवार — बिजनेसमैन, पारिवारिक संपर्क मजबूत बताया जाता है।
  • बहन: विजया पाटिल — पारिवारिक ढांचे का एक अहम हिस्सा।
  • चाचा: शरद पवार — महाराष्ट्र और राष्ट्रीय राजनीति के प्रतिष्ठित नेता, जिनके साथ अजित ने दशकों तक राजनीतिक सफर साझा किया।

अजित पवार को परिवार और समर्थकों द्वारा प्यार से “दादा” बुलाया जाता था। उनके बेटे पार्थ और जय दोनों ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत पिता के अनुभव से सीखकर की थी।


अजित पवार का राजनीतिक सफर

अजित पवार का जन्म 22 जुलाई 1959 को अहमदनगर जिले के देओलाली प्रवारा गांव में हुआ था। पिता अनंतराव पवार के निधन के बाद उन्होंने परिवार की जिम्मेदारियाँ संभालते हुए अपनी राजनीति की शुरुआत सहकारी चीनी मिलों के माध्यम से की।

1991 में उन्होंने बारामती से लोकसभा सांसद के रूप में राजनीति में प्रवेश किया, शरद पवार के लिए राह बनाई और बाद में विधानसभा में शानदार प्रदर्शन किया। 1999 के बाद एनसीपी के गठन के साथ उन्होंने कई महत्वपूर्ण विभागों में मंत्री पद संभाला और उपमुख्यमंत्री रहते छह बार महाराष्ट्र सरकार में काम किया — यह एक रिकॉर्ड रहा।


राजनीतिक पहचान और विवाद

अजित पवार को मेहनती, समय पर काम पूरा करने वाले और विकास कार्यों पर केंद्रित नेता के रूप में देखा जाता था। हालांकि राजनीतिक सफर में विवाद भी रहे — 2012 में सिंचाई विभाग घोटाले से जुड़े सवाल और 2013 में कुछ विवादित बयानों के चलते आलोचनाएँ भी झेलनी पड़ीं।

2023 में एनसीपी के भीतर मतभेद के बाद उन्होंने अलग गुट बनाया, और चुनाव आयोग ने उनके गुट को अलग पहचान दी। इसके बाद वे बीजेपी–शिवसेना के महायुति गठबंधन में शामिल होकर उपमुख्यमंत्री बने।


दुर्घटना का सांकेतिक असर

इस विमान दुर्घटना ने सिर्फ एक नेता को नहीं, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के एक मजबूत स्तंभ को हमेशा के लिए झकझोर दिया है। बारामती से उठी यह खबर महाराष्ट्र के साथ-साथ पूरे देश में शोक और सियासी चर्चाओं को जन्म दे रही है। अजित पवार की राजनीतिक विरासत और उनका परिवार आगे इसी इतिहास को संभाले रखने की कोशिश करेगा।

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