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भारत–बलूचिस्तान साझेदारी पर खुलकर बोला बलोच नेता, नए साल पर पाकिस्तान से आई चिट्ठी ने मचाई हलचल

Swaraj Times Desk: नए साल 2026 की शुरुआत पर पाकिस्तान से भारत के लिए एक ऐसा ओपन लेटर सामने आया है, जिसने दक्षिण एशिया की सियासत में नई बहस छेड़ दी है। यह पत्र बलोच नेता Mir Yar Baloch ने भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar को संबोधित करते हुए लिखा है। इस खुले पत्र में उन्होंने भारत सरकार और 140 करोड़ भारतीयों को नए साल की शुभकामनाएं देने के साथ-साथ पाकिस्तान, आतंकवाद और चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को लेकर तीखी बातें कही हैं।

भारत को नए साल की शुभकामनाएं

मीर यार बलोच ने लिखा कि वह “रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान” के करीब 6 करोड़ देशभक्त नागरिकों की ओर से भारत की संसद, मीडिया, सिविल सोसाइटी और आम जनता को नववर्ष 2026 की बधाई देते हैं। उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, व्यापारिक और आध्यात्मिक रिश्तों का जिक्र किया। खासतौर पर हिंगलाज माता मंदिर को साझा विरासत का प्रतीक बताया।

ऑपरेशन सिंदूर की खुली तारीफ

पत्र में भारत द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए सख्त कदमों की सराहना की गई। मीर यार बलोच ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत का “ऑपरेशन सिंदूर” सिर्फ जवाबी कार्रवाई नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी कदम था। उनके मुताबिक, पाकिस्तान समर्थित आतंकी ढांचे पर कार्रवाई से पूरे इलाके में साफ संदेश गया है।

79 साल से पाकिस्तान के कब्जे में बलूचिस्तान

मीर यार बलोच ने आरोप लगाया कि बलूचिस्तान पिछले 79 वर्षों से पाकिस्तान के कब्जे, सैन्य दमन और मानवाधिकार उल्लंघनों का शिकार रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अब समय आ गया है कि इस समस्या को “जड़ से खत्म” किया जाए, ताकि बलूचिस्तान को स्थायी शांति और संप्रभुता मिल सके।

भारत के साथ खड़े होने का ऐलान

बलोच नेता ने कहा कि बलूचिस्तान की जनता भारत और उसकी सरकार के साथ मजबूती से खड़ी है। उन्होंने शांति, व्यापार, ऊर्जा, सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में भारत के साथ भरोसेमंद साझेदारी की इच्छा जताई।

चीन–पाकिस्तान गठजोड़ पर चेतावनी

पत्र का सबसे अहम हिस्सा चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) को लेकर चेतावनी है। मीर यार बलोच ने कहा कि CPEC अब अंतिम चरण में है और यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बलूचिस्तान में चीनी सेना की तैनाती हो सकती है। उनके मुताबिक, यह न सिर्फ बलूचिस्तान बल्कि भारत की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा होगा।

क्षेत्रीय शांति की उम्मीद

पत्र के अंत में उन्होंने कहा कि भारत और बलूचिस्तान की मजबूत साझेदारी पूरे दक्षिण एशिया में शांति और स्थिरता की दिशा तय कर सकती है। उनका मानना है कि अब केवल बयान नहीं, बल्कि ठोस और व्यावहारिक सहयोग का समय है।

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