भारतीय सेना की जवाबी कार्रवाई पर पाकिस्तान की पहली खुली स्वीकृति – “जवान घायल हुए, कई बेस उजड़ गए”
Swaraj Times Desk: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर पाकिस्तान ने पहली बार बड़ा स्वीकारोक्ति भरा बयान दिया है। पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि भारतीय कार्रवाई के दौरान 36 घंटों के भीतर कम से कम 80 ड्रोन पाकिस्तानी सीमा में दाखिल हुए। डार ने यह भी माना कि भारत की ड्रोन स्ट्राइक में रावलपिंडी स्थित पाकिस्तान वायुसेना का प्रमुख ठिकाना – नूर खान एयरबेस – बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुआ।
डार के मुताबिक, पाकिस्तान की सेना ने “79 ड्रोन को इंटरसेप्ट किया”, लेकिन एक ड्रोन सैन्य संरचना से टकराया, जिसके कारण कई जवान घायल हुए। यह स्वीकारोक्ति ऑपरेशन सिंदूर के प्रभाव का सबसे बड़ा आधिकारिक प्रमाण मानी जा रही है।
ऑपरेशन सिंदूर – कब और क्यों?
7 मई की सुबह भारत ने यह ऑपरेशन शुरू किया था। यह कदम 22 अप्रैल को जम्मू–कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के मात्र 15 दिन बाद उठाया गया — जिस घटना में निर्दोष नागरिकों की मौत ने पूरे देश में रोष पैदा कर दिया था। भारतीय कार्रवाई का उद्देश्य पीओके और पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी ठिकानों और लॉजिस्टिक नेटवर्क को ध्वस्त करना था। सेना ने इस दौरान 9 आतंकी कैंप और कई सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को लक्ष्य बनाया।
11 एयरबेस हुए थे टारगेट – रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान के कुल 11 एयरबेस लक्ष्य बने।
इनमें —
• नूर खान एयरबेस (रावलपिंडी)
• सरगोधा
• रफीकी
• जैकोबाबाद
• मुरीदके
और अन्य बेस शामिल बताए जा रहे हैं।
पाकिस्तान ने बाद में इन ठिकानों को रिपेयर कराया था, लेकिन नुक़सान कितना हुआ, इस पर अब तक आधिकारिक आंकड़े सामने नहीं आए थे।
भारतीय जनरल ने पाक दावे खारिज किए
डार के बयान पर भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लों ने प्रतिक्रिया दी और कहा कि पाकिस्तान “मामूली नुकसान” का दावा करके सच्चाई छिपा रहा है। उन्होंने बताया कि समा टीवी की एक पुरानी रिपोर्ट में 138 लोगों को मरणोपरांत वीरता सम्मान दिए जाने का जिक्र है — जो नुकसान के स्तर को खुद बताता है।
ढिल्लों ने यह भी दावा किया कि नूर खान एयरबेस पर हमले की पहली पुष्टि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने की थी। पाकिस्तान के एडवाइजर राणा सनाउल्लाह के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा —
“पाकिस्तान के पास सिर्फ 30–45 सेकंड थे तय करने के लिए कि भारतीय मिसाइल परमाणु हथियार से लैस है या नहीं।”
