कोगिला लेआउट में चला बुलडोज़र — कर्नाटक–केरल सरकार में सीधा टकराव, कांग्रेस अंदर से भी दबी-दबी सियासी आग!
Swaraj Times Desk: कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बुलडोज़र चलाया गया और राजनीति की चिंगारी तुरंत भड़क उठी। येलहंका के पास कोगिला लेआउट में कई घरों को हटाने की कार्रवाई ने कांग्रेस पार्टी के भीतर बेचैनी, मीडिया बहस और राज्य–राज्य के बीच राजनैतिक टकराव को हवा दे दी।
स्थानीय प्रशासन के अनुसार, कोगिला लेआउट में कई परिवारों ने कचरा निपटान और खदान क्षेत्र से सटे भूभाग पर अवैध झोपड़ियां बना ली थीं। सरकारी रिकॉर्ड में यह ज़मीन लगभग 9 वर्षों से सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट यूनिट के लिए चिन्हित बताई जाती है। प्रशासन का दावा है कि लोगों को हटाने के लिए पहले नोटिस दिए गए — लेकिन जब पालन नहीं हुआ, तो बुलडोजर ही अंतिम विकल्प रह गया।
लेकिन तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आते ही मामला अचानक मानवीय संवेदनशीलता बनाम प्रशासनिक मजबूरी की बहस में बदल गया। कई परिवार, जिनमें मुस्लिम समुदाय के लोग शामिल बताए जा रहे हैं, खुले में आ गए — और यहीं से राजनीति ने मोड़ लिया।
कांग्रेस के भीतर बेचैनी – सिद्धारमैया–DK शिवकुमार की मजबूर एकता
दिलचस्प बात यह है कि यह विवाद ऐसे समय आया जब कर्नाटक की कांग्रेस सरकार पहले ही आंतरिक शक्ति संघर्ष की चर्चाओं में रहती है।
लेकिन इस बार — मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री DK शिवकुमार एक ही मंच पर, एक ही सुर में नज़र आए।
सिद्धारमैया ने X (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा:
“यह कचरे के निपटान क्षेत्र पर अवैध कब्जा था। बार-बार चेतावनी देने के बावजूद हटने को तैयार नहीं थे — इसलिए प्रशासन ने कार्रवाई की।”
शिवकुमार ने भी तुरंत मोर्चा संभाला।
उनका बयान था:
“हम सार्वजनिक ज़मीन को भूमि माफिया और अवैध बस्तियों के हवाले नहीं कर सकते। बिना तथ्य समझे बाहर के नेता टिप्पणी न करें।”
यहाँ “बाहर के नेता” शब्द का संकेत केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन पर माना गया — क्योंकि उन्होंने इस कार्रवाई को ‘बुलडोज़र राज’ कहकर हमला बोला और आरोप लगाया कि “मुस्लिम परिवारों को निशाना बनाकर हटाया गया।”
केरल बनाम कर्नाटक – कांग्रेस की ‘डबल सरकार’ में तनाव
केरल की CPI(M) सरकार और कर्नाटक की कांग्रेस सरकार — आमतौर पर राष्ट्रीय मुद्दों पर एक-दूसरे के साथ दिखती रही हैं, लेकिन पहला मौका है जब सीधे-साफ़ आरोप–प्रत्यारोप दिखाई दिये।
विजयन के बयान के बाद विरोधी पार्टियों ने मौके को हाथों हाथ लिया और सोशल मीडिया पर सवाल उठाया —
“अगर भाजपा राज्यों में बुलडोज़र गलत है, तो कांग्रेस के शासन में वही कार्रवाई सही कैसे?”
यही वजह है कि कांग्रेस हाईकमान से जुड़े नेताओं ने भी नर्मी से परोक्ष आलोचना की —
AICC महासचिव KC वेणुगोपाल ने कहा:
“ऐसे कदमों में संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण दिखना सबसे पहला कर्तव्य होना चाहिए।”
उनका यह बयान इसी बात का संकेत देता है कि पार्टी में असहमति दबकर भी मौजूद है।
