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सेना भवन में शिवसैनिकों को भावुक संदेश – “कुर्सी छोड़ दूँगा, वफादारी मत छोड़ना… 16 जनवरी को शिवसेना का दम दिखना चाहिए”

Swaraj Times Desk: मुंबई में BMC चुनाव 2026 से पहले राजनीतिक तापमान चरम पर है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने सेना भवन में कार्यकर्ताओं के साथ हुई अहम बैठक में भाजपा को तीखा संदेश दिया और साथ ही कांग्रेस पर भी कटाक्ष किया। बैठक का माहौल भावनात्मक और आक्रामक दोनों रहा, जहां उद्धव ने स्पष्ट कहा —

“बीजेपी ने हमारा गलत इस्तेमाल किया। कांग्रेस के साथ भी यही अनुभव मिला। अब इतने सालों बाद हम महाराष्ट्र के लिए, मराठी अस्मिता के लिए MNS के साथ आए हैं।”

“धनुष–बाण छीना गया, मशाल कैसे मिली – सोचिए”

उद्धव ठाकरे ने शिवसैनिकों को संबोधित करते हुए कहा कि पार्टी ने सबसे कठिन दौर देखा है, लेकिन आत्मसमर्पण नहीं किया। उन्होंने कहा —

“जिस दिन धनुष–बाण का निशान छीन लिया, सोचिए — मशाल कैसे मिली? यह सिर्फ कानूनी लड़ाई नहीं थी, यह भावनात्मक लड़ाई थी।”

उन्होंने शिवसैनिकों से अपील की कि कोई भी दल–बदल न करे और टिकट न मिलने पर भी पार्टी न छोड़े। उद्धव ने तंज कसते हुए कहा —

“अगर किसी को टिकट न मिले और वो BJP में चला जाए, तो क्या मैं भी टिकट न मिलने पर BJP में शामिल हो जाऊं?”

“गठबंधन की मजबूरियां – लेकिन ये लड़ाई अलग है”

ठाकरे ने MNS के साथ बने नए राजनीतिक समीकरण पर भी बात की। उनका कहना था कि कई बार गठबंधन वैसा नहीं होता जैसा कोई चाहता है, लेकिन ज़रूरत होती है भावनात्मक और रणनीतिक लड़ाई की।

उन्होंने कहा —

“गठबंधन में अपने कुछ वार्ड छोड़ने पड़ते हैं। लेकिन पूछिए – हमने यह फैसला क्यों किया? क्योंकि यह मराठी अस्मिता और मुंबई बचाने की लड़ाई है।”

“16 जनवरी को जश्न दिखना चाहिए”

ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को आगे की रणनीति और उत्साह के लिए तैयार करते हुए कहा —

“आज जो जोश आपके अंदर दिख रहा है, वह असली परीक्षा 16 जनवरी को दिखाई देनी चाहिए। कई नामों का चयन आज ही करूंगा, कल घोषणा होगी। जो टिकट नहीं पाएगा, वह भी मैदान छोड़कर नहीं जाएगा।”

उन्होंने शिवसेना की ऐतिहासिक पहचान की याद दिलाते हुए कहा —

“छत्रपति शिवाजी महाराज के समय से इस भगवे झंडे ने कितने बंटवारे देखे हैं। किस्मत बहादुरों को चुनती है, कायरों को नहीं। अब कोई अब्दाली हो या ‘Anaconda’ (BJP) – हराना है, मतलब हराना ही है। मुंबई कोई हमसे छीन नहीं सकता। इतने साल हम लड़े और आगे भी लड़ेंगे।”

महाराष्ट्र की सियासी जमीन पर हलचल

उधर, दूसरी तरफ वंचित बहुजन आघाड़ी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की संभावना भी बढ़ गई है। वहीं भाजपा–शिंदे गुट में टिकट वितरण, ठाणे–मुंबई फॉर्मूले और संयुक्त प्रचार पर लगातार बैठकों का दौर जारी है, हालांकि दोनों ने चुनावी अभ्यास तेज कर दिया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, उद्धव का यह बयान न सिर्फ शिवसैनिकों के अंदर भावनात्मक ऊर्जा भरने के लिए था, बल्कि राजनीतिक संकेत भी — कि BMC चुनाव केवल नगरपालिका का चुनाव नहीं, बल्कि “सत्ता मान–सम्मान और अस्तित्व” की लड़ाई है।

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