Karnataka CM Siddaramaiah: ग्रामीण रोजगार पर टकराव तेज, कर्नाटक बनाम केंद्र की नई सियासी जंग
Swaraj Times Desk: कर्नाटक की राजनीति में मंगलवार को बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने विधानसभा में एक अहम प्रस्ताव पेश करते हुए केंद्र सरकार से कथित “VB-G RAM G” कानून को तुरंत रद्द करने की मांग की। साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने की जोरदार पैरवी की।
विधानसभा में क्या बोले CM?
प्रस्ताव पेश करते हुए सिद्धारमैया ने कहा कि नया ग्रामीण रोजगार कानून संघीय ढांचे के खिलाफ है और इससे राज्यों के वित्तीय अधिकार कमजोर हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इससे ग्राम पंचायतों की शक्तियां सीमित हो गई हैं, जबकि मनरेगा ने गांवों में रोज़गार, बुनियादी ढांचा और आत्मनिर्भरता को मजबूत किया था।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण गरीबों के लिए “जीवनरेखा” थी। उनके मुताबिक, मनरेगा के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, तालाब, जल संरक्षण और सामुदायिक परिसंपत्तियों का निर्माण हुआ, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को सहारा मिला।
विपक्ष का जोरदार विरोध
जैसे ही प्रस्ताव पढ़ा गया, विधानसभा में विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों ने तीखी आपत्ति दर्ज कराई। नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने कहा कि पूरे सदन की ओर से विरोध दर्ज करना गलत है और इसे केवल सरकार का मत बताया जाना चाहिए। इस पर सदन में हंगामा बढ़ गया और नारेबाजी शुरू हो गई।
हालांकि मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव पढ़ना जारी रखा और विपक्ष को चर्चा के दौरान अपनी बात रखने की सलाह दी।
मुद्दा सिर्फ रोजगार नहीं, अधिकारों का भी
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बहस सिर्फ एक योजना की बहाली तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों के अधिकार बनाम केंद्र की नीतियों का बड़ा सवाल बनती जा रही है। कर्नाटक सरकार का दावा है कि नया कानून वित्तीय बोझ बढ़ाता है और विकेंद्रीकरण की भावना के विपरीत है। अब यह प्रस्ताव केंद्र और राज्य के बीच नई राजनीतिक खींचतान का कारण बन सकता है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर भी बहस तेज होने के आसार हैं।
