US Israel Iran War: डिएगो गार्सिया बेस को लेकर अमेरिका-यूके रिश्तों में तनाव, मिडिल ईस्ट संकट ने बढ़ाई कूटनीतिक गर्मी
Swaraj Times Desk: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों में नई खटास सामने आई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर खुलकर नाराजगी जताई है। ट्रंप का आरोप है कि ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के दौरान ब्रिटेन ने अपने रणनीतिक सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया के इस्तेमाल की अनुमति देने में अनावश्यक देरी की।
डिएगो गार्सिया, जो हिंद महासागर में स्थित है और चागोस द्वीपसमूह का हिस्सा है, लंबे समय से अमेरिका-यूके रक्षा सहयोग का अहम केंद्र रहा है। ट्रंप का कहना है कि इस बेस का समय पर इस्तेमाल न होने से सैन्य रणनीति प्रभावित हुई। उन्होंने एक इंटरव्यू में कहा कि “ब्रिटेन को तुरंत अनुमति देनी चाहिए थी, लेकिन बहुत देर कर दी गई।”
ब्रिटेन की सफाई और रणनीतिक संतुलन
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने 1 मार्च 2026 को स्पष्ट किया था कि उनका देश सीधे तौर पर मिडिल ईस्ट संघर्ष में शामिल नहीं है। उन्होंने खाड़ी देशों में रह रहे ब्रिटिश नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताया। हालांकि बाद में उन्होंने सीमित और रक्षात्मक कार्रवाई के लिए अमेरिका को बेस उपयोग की अनुमति दी।
ट्रंप ने आरोप लगाया कि स्टार्मर घरेलू विरोध और कानूनी जटिलताओं से घिरे हुए थे, इसलिए निर्णय लेने में देरी हुई। उनके मुताबिक, “अमेरिका और ब्रिटेन के बीच ऐसा पहले कभी नहीं हुआ।”
क्या बदलेगा ‘स्पेशल रिलेशनशिप’ का समीकरण?
अमेरिका और ब्रिटेन के बीच दशकों पुराना ‘स्पेशल रिलेशनशिप’ रक्षा और विदेश नीति में मजबूत साझेदारी का प्रतीक रहा है। लेकिन ईरान को लेकर इस ताजा विवाद ने संकेत दिया है कि वैश्विक संघर्षों के समय सहयोग में भी राजनीतिक संतुलन और घरेलू दबाव अहम भूमिका निभाते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि डिएगो गार्सिया जैसे रणनीतिक ठिकाने भविष्य में भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे, लेकिन निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और समयबद्धता की कमी से कूटनीतिक असहजता बढ़ सकती है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यह बयानबाजी सिर्फ दो नेताओं का टकराव नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन की नई परत को उजागर करती है।
