UP News: योगी सरकार का बड़ा फैसला — नेपाल बॉर्डर जिलों में प्रॉपर्टी डील पर कड़ी निगरानी
Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश में जमीन की खरीद–फरोख्त को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। योगी आदित्यनाथ सरकार ने भारत–नेपाल सीमा से सटे जिलों में संपत्ति रजिस्ट्री के लिए PAN कार्ड अनिवार्य कर दिया है। अब तक जिन मामलों में फॉर्म 60 के जरिए बिना PAN भी रजिस्ट्री हो जाती थी, वह विकल्प खत्म कर दिया गया है।
क्या बदला है?
महानिरीक्षक निबंधन कार्यालय ने सभी उप–निबंधकों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि खरीदार और विक्रेता—दोनों के PAN की एंट्री और ऑनलाइन सत्यापन अनिवार्य रूप से किया जाए। विभागीय सॉफ्टवेयर में यह व्यवस्था जोड़ दी गई है, जिससे रियल-टाइम वेरिफिकेशन संभव होगा।
सरकार ने क्यों लिया यह फैसला?
यह कदम वित्तीय अपराधों पर रोक और राष्ट्रीय सुरक्षा के नजरिए से अहम माना जा रहा है। सीमावर्ती इलाकों में फर्जी नामों से जमीन खरीद, बेनामी संपत्ति और संदिग्ध निवेश की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं। PAN अनिवार्यता से अब हर लेनदेन आयकर प्रणाली से जुड़ा रहेगा, जिससे मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध पूंजी के इस्तेमाल पर नकेल कसी जा सकेगी।
किन जिलों में लागू होगा नियम?
यह सख्ती उन जिलों में लागू होगी जो नेपाल सीमा से सटे हैं—जैसे गोरखपुर, महाराजगंज, सिद्धार्थनगर, लखीमपुर खीरी, बहराइच, श्रावस्ती और बलरामपुर। इन क्षेत्रों में सीमा पार आवाजाही और आर्थिक गतिविधियों को देखते हुए पारदर्शिता बढ़ाना प्रशासन की प्राथमिकता बताई जा रही है।
आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?
ईमानदार खरीदारों और विक्रेताओं के लिए प्रक्रिया अब थोड़ी औपचारिक जरूर होगी, लेकिन सुरक्षित भी। दस्तावेज़ीकरण मजबूत होने से भविष्य में संपत्ति विवादों और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
सरकार का संदेश साफ है—जमीन का सौदा अब पूरी तरह पारदर्शी और ट्रैसेबल होगा। सीमावर्ती इलाकों में यह कदम सुरक्षा और आर्थिक अनुशासन, दोनों को मजबूत करने की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है।
