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VB-G-RAM-G कानून के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा प्लान, गांव-गांव में आंदोलन की तैयारी

Swaraj Times Desk: कांग्रेस ने केंद्र सरकार के VB-G-RAM-G कानून के खिलाफ राष्ट्रव्यापी ‘मनरेगा बचाओ आंदोलन’ छेड़ने का ऐलान कर दिया है. पार्टी का कहना है कि यह कानून महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को धीरे-धीरे खत्म करने की साजिश है, जिससे ग्रामीण भारत की आजीविका, महिलाओं की भागीदारी और पंचायत व्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंचेगा.

कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आंदोलन की विस्तृत रूपरेखा जारी करते हुए केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा कि मनरेगा हर साल 5 से 6 करोड़ लोगों को रोजगार देता है और यह सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. इसके कमजोर होने का सीधा असर पलायन, गरीबी और सामाजिक असमानता पर पड़ेगा.

पंचायतों से अधिकार छीने गए तो खत्म होगी रोजगार की गारंटी

केसी वेणुगोपाल ने चेतावनी दी कि अगर काम तय करने का अधिकार पंचायतों से छीनकर दिल्ली में केंद्रीकृत किया गया, तो यह संविधान में दिए गए रोजगार की गारंटी के वादे को खत्म करने जैसा होगा. उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानून के तहत पंचायतें केवल आदेश मानने वाली इकाइयां बनकर रह जाएंगी. इससे स्थानीय जरूरतों के मुताबिक काम तय करने की आत्मा ही समाप्त हो जाएगी.

उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा के करीब 60 प्रतिशत लाभार्थी महिलाएं हैं. ऐसे में योजना को कमजोर करने का सबसे बड़ा खामियाजा ग्रामीण महिलाओं को भुगतना पड़ेगा. न्यूनतम मजदूरी पर दबाव, काम के दिनों में कटौती और फंड आवंटन की अनिश्चितता महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला है.

‘विकसित भारत नहीं, विनाश भारत’

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि VB-G-RAM-G असल में गारंटी का केंद्रीकरण है, न कि विकास. उन्होंने सवाल उठाया कि राज्यों और पंचायतों को मिलने वाले फंड का आधार क्या होगा, यह सरकार ने स्पष्ट नहीं किया है. उनके मुताबिक 60-40 वित्तीय फॉर्मूला संविधान की भावना के खिलाफ है और यह पहली बार लाया गया है.

रमेश ने याद दिलाया कि मनरेगा 2005 में कानून बना और तत्कालीन सरकार ने इसे तीन साल में पूरे देश में लागू कर दिया था. आज उसी कानून को कमजोर किया जा रहा है, जो ग्रामीण भारत के लिए सुरक्षा कवच था.

तीन चरणों में होगा आंदोलन

कांग्रेस ने साफ किया है कि यह आंदोलन दिल्ली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पंचायत-केंद्रित होगा.

पहला चरण (8–11 जनवरी 2026):
तैयारी बैठक, जिला स्तर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस और एक दिवसीय उपवास.

दूसरा चरण (12–30 जनवरी 2026):
ग्राम पंचायतों में चौपाल, नुक्कड़ सभाएं, पंपलेट वितरण और 30 जनवरी को शहीद दिवस पर शांतिपूर्ण धरना.

तीसरा चरण (31 जनवरी–25 फरवरी 2026):
डीएम/सीएम कार्यालयों का घेराव, विधानसभा घेराव और देशभर में चार जोनल AICC रैलियां.

सियासी संदेश साफ

कांग्रेस ने स्पष्ट कर दिया है कि मनरेगा पर कोई समझौता नहीं होगा. पार्टी इसे सिर्फ योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत के सम्मान और अधिकार की लड़ाई बता रही है. आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा संसद से लेकर गांव की चौपाल तक गूंजने वाला है.

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