संविधान की दुहाई देकर शिक्षा मंत्री ने दिया भरोसा, मामला अब सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में
Swaraj Times Desk: देशभर में UGC 2026 इक्विटी रेगुलेशन को लेकर जारी विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार विस्तार से प्रतिक्रिया दी है। बढ़ती राजनीतिक बयानबाज़ी और छात्र संगठनों के विरोध के बीच उन्होंने साफ कहा कि सरकार किसी भी वर्ग के साथ भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होने देगी।
उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में लागू होने वाली हर व्यवस्था संविधान के दायरे में होगी और किसी भी कानून का दुरुपयोग बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
क्या बोले धर्मेंद्र प्रधान?
शिक्षा मंत्री ने कहा:
“मैं पूरी विनम्रता के साथ सभी को आश्वस्त करना चाहता हूं कि किसी के साथ अन्याय नहीं होगा। किसी भी नियम का गलत इस्तेमाल नहीं करने दिया जाएगा। जो भी होगा, वह भारतीय संविधान की भावना के अनुरूप होगा।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह विषय अब सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है, इसलिए सरकार न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करेगी।
सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला
UGC के नए नियमों को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नियमों में जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा सीमित कर दी गई है, जिससे कुछ वर्ग संस्थागत सुरक्षा से बाहर रह सकते हैं। खास तौर पर नियम 3(C) को लेकर सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, सरकार और UGC का पक्ष है कि इन नियमों का उद्देश्य शिक्षा संस्थानों में समानता, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करना है।
सरकार का क्या है दावा?
धर्मेंद्र प्रधान के मुताबिक:
- छात्रों, शिक्षकों और स्टाफ के अधिकारों की रक्षा प्राथमिकता है
- किसी भी समुदाय के खिलाफ दुरुपयोग या झूठे मामले को बढ़ावा नहीं मिलेगा
- नियमों को लेकर जो भी शंकाएं हैं, उन्हें संवाद के जरिए दूर किया जाएगा
उन्होंने कहा कि सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि शैक्षणिक माहौल सुरक्षित और संतुलित बना रहे।
विवाद क्यों बढ़ा?
देश के कई हिस्सों में छात्र संगठनों और कुछ सामाजिक समूहों ने इन नियमों को लेकर विरोध प्रदर्शन किए हैं। आरोप है कि नियमों में कुछ प्रावधानों से भविष्य में पक्षपात या कानूनी असंतुलन की स्थिति बन सकती है। वहीं समर्थक पक्ष का कहना है कि यह कदम संस्थागत भेदभाव को रोकने के लिए जरूरी है।
UGC नियमों पर मचा यह बवाल अब सियासत से आगे बढ़कर न्यायिक समीक्षा के चरण में पहुंच चुका है। धर्मेंद्र प्रधान का बयान इस पूरे विवाद में सरकार की आधिकारिक लाइन को साफ करता है —
“संविधान सर्वोपरि, किसी के साथ अन्याय नहीं।”
अब सबकी नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी है, जो तय करेगी कि ये नियम किस रूप में लागू होंगे।
