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एससी-एसटी प्रतिनिधित्व की मांग के बीच दिग्विजय सिंह के बयान ने बढ़ाई अटकलें

Swaraj Times Desk: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है. कांग्रेस के दिग्गज नेता दिग्विजय सिंह के हालिया बयान ने राज्यसभा चुनाव को लेकर नए सियासी संकेत दे दिए हैं. उनके इस बयान के बाद कांग्रेस खेमे में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है कि क्या दिग्विजय सिंह अब दोबारा राज्यसभा नहीं जाएंगे.

कहां से शुरू हुआ पूरा मामला?

दरअसल, मध्य प्रदेश कांग्रेस के अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने पार्टी नेतृत्व को एक पत्र लिखा था. इस पत्र में मांग की गई थी कि आगामी राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग से किसी नेता को उम्मीदवार बनाना चाहिए. यह पत्र सामने आते ही कांग्रेस के भीतर संभावित उम्मीदवारों और मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गईं.

दिग्विजय सिंह ने क्या कहा?

इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए दिग्विजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि राज्यसभा में जाना या न जाना उनके हाथ में नहीं है, फैसला पार्टी को करना है. हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ दिया कि वह अपनी राज्यसभा सीट खाली कर रहे हैं. उनके इस बयान को कांग्रेस के भीतर एक बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है. माना जा रहा है कि दिग्विजय सिंह अब उच्च सदन में दोबारा जाने के इच्छुक नहीं हैं या पार्टी को नए चेहरे को मौका देने का संकेत दे रहे हैं.

राज्यसभा गणित क्या कहता है?

मध्य प्रदेश से दिग्विजय सिंह का राज्यसभा कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है. इस साल राज्य से कुल तीन राज्यसभा सीटों पर चुनाव होने हैं. मौजूदा विधानसभा संख्या बल की बात करें तो कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास 165 विधायक हैं. इसके अलावा भारत आदिवासी पार्टी (BAP) का एक विधायक है. एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 59 विधायकों के वोट की जरूरत होती है.

फिलहाल मध्य प्रदेश से जिन राज्यसभा सांसदों का कार्यकाल खत्म हो रहा है, उनमें दिग्विजय सिंह के अलावा जॉर्ज कुरियन और सुमेर सिंह सोलंकी शामिल हैं. संख्या बल के लिहाज से कांग्रेस के लिए एक सीट जीतना चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन नामांकन को लेकर रणनीति बेहद अहम मानी जा रही है.

कांग्रेस के लिए क्या हैं मायने?

दिग्विजय सिंह का यह बयान कांग्रेस के भीतर पीढ़ी परिवर्तन और सामाजिक संतुलन की राजनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है. पार्टी यदि एससी या एसटी वर्ग से किसी नए चेहरे को राज्यसभा भेजती है, तो यह एक बड़ा राजनीतिक संदेश होगा. वहीं, दिग्विजय सिंह का पीछे हटना कांग्रेस में नए नेतृत्व को आगे लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

अब सबकी नजरें कांग्रेस हाईकमान के फैसले पर टिकी हैं कि वह मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए किसे मैदान में उतारती है.

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