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एकता सबसे ऊपर, भेदभाव किसी भी रूप में स्वीकार नहीं — सरकार से की ठोस कदम उठाने की अपील

Swaraj Times Desk: UGC के नए नियमों को लेकर देशभर में जारी बहस के बीच कल्कि पीठाधीश्वर आचार्य प्रमोद कृष्णम ने एक संतुलित लेकिन सख्त संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि आज देश के सामने सबसे बड़ा सवाल किसी नियम या नीति से भी ऊपर है — और वह है राष्ट्रीय एकता। जाति, धर्म और वर्ग के नाम पर समाज को बांटना भारत को कमजोर करने की साजिश है और इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।

उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले के श्यामनगर गांव में एक शोक सभा में पहुंचे आचार्य प्रमोद कृष्णम ने मीडिया से बातचीत में कहा कि देश को आज सामाजिक समरसता की सबसे ज्यादा जरूरत है। उन्होंने साफ कहा कि जातिगत या धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव न तो संविधान की भावना के अनुरूप है और न ही भारतीय संस्कृति की।

सरकार से क्या की अपील?

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार से अपील की कि वे ऐसी नीतियों और फैसलों पर विशेष ध्यान दें जो समाज को जोड़ने का काम करें, तोड़ने का नहीं। उन्होंने कहा कि सरकार के साथ-साथ समाज के हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है कि वह नफरत फैलाने वाली सोच से दूर रहे और भाईचारे को मजबूत करे।

उनका कहना था कि सिर्फ कानून बनाना काफी नहीं, बल्कि ऐसा माहौल तैयार करना जरूरी है जहां हर वर्ग खुद को सम्मानित और सुरक्षित महसूस करे।

शंकराचार्य विवाद पर भी बोले

इस दौरान उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद पर भी टिप्पणी की। आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि प्रशासन को ऐसे धार्मिक मामलों में अधिक संवेदनशीलता और संयम बरतना चाहिए था। उनके अनुसार, एक स्थानीय स्तर का मुद्दा अब राष्ट्रीय बहस बन गया है, जो सनातन परंपराओं से जुड़े लोगों की चिंता बढ़ाता है।

उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ताकतें जानबूझकर धार्मिक और सामाजिक मुद्दों को उछालकर भ्रम और तनाव पैदा करना चाहती हैं। ऐसे समय में संतों, धर्माचार्यों और समाज के जिम्मेदार लोगों को मिलकर शांति और एकता का संदेश देना चाहिए।

अजित पवार के निधन पर शोक

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन पर भी गहरी संवेदना व्यक्त की और इसे सार्वजनिक जीवन के लिए बड़ी क्षति बताया।

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