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डिप्टी CM के बयान के समर्थन में उतरे PWD मंत्री, अफसरशाही को लेकर कांग्रेस सरकार में बढ़ी बेचैनी

Swaraj Times Desk: हिमाचल प्रदेश की राजनीति में अफसरशाही को लेकर एक बार फिर तीखा विवाद खड़ा हो गया है. राज्य के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने उत्तर प्रदेश और बिहार से आए वरिष्ठ IAS-IPS अधिकारियों पर सीधा निशाना साधते हुए सख्त टिप्पणी की है. उन्होंने यह बयान सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दिया, जिससे प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा हो गई है.

दरअसल, विक्रमादित्य सिंह ने हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री के मंडी में दिए उस बयान का खुलकर समर्थन किया है, जिसमें अफसरशाही पर सवाल उठाए गए थे. हालांकि, जहां मुकेश अग्निहोत्री ने किसी राज्य का नाम नहीं लिया था, वहीं विक्रमादित्य सिंह ने साफ तौर पर यूपी और बिहार के अधिकारियों का जिक्र कर दिया.

‘हिमाचलियत की धज्जियां उड़ा रहे हैं अफसर’

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में विक्रमादित्य सिंह ने लिखा कि कुछ यूपी-बिहार के आला IAS-IPS अधिकारी हिमाचल में रहते हुए “हिमाचलियत” की भावना को नुकसान पहुंचा रहे हैं. उन्होंने कहा कि ऐसे अधिकारियों का प्रदेश से भावनात्मक जुड़ाव नहीं दिखता और अगर समय रहते उन पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो हिमाचल के हितों को नुकसान हो सकता है.

हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बाहर के राज्यों से आए अधिकारियों का सम्मान किया जाता है, लेकिन उन्हें हिमाचल के स्थानीय अधिकारियों से सीख लेने की जरूरत है. विक्रमादित्य सिंह ने दो टूक कहा कि जब तक कोई अधिकारी हिमाचल में तैनात है, तब तक उसे यहां के लोगों की सेवा करनी चाहिए और “शासक बनने की गलती नहीं करनी चाहिए”.

डिप्टी CM के बयान से शुरू हुआ विवाद

इससे पहले 12 दिसंबर 2025 को मंडी में कांग्रेस सरकार के तीन साल पूरे होने के कार्यक्रम के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने मंच से अफसरशाही पर तीखा हमला बोला था. उन्होंने आरोप लगाया था कि कुछ अधिकारी कांग्रेस सरकार होते हुए भी भाजपा नेताओं के घरों में हाजिरी लगा रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से अफसरों पर सख्ती बरतने तक की बात कही थी.

संवेदनशील मामला, बढ़ सकता है राजनीतिक टकराव

विक्रमादित्य सिंह की पोस्ट के बाद यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है. IAS और IPS अधिकारी केंद्र और राज्य सरकारों के बीच प्रशासनिक सेतु होते हैं, ऐसे में इस तरह की सार्वजनिक टिप्पणियां राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर असर डाल सकती हैं. अब सबकी नजर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के रुख पर टिकी है कि वे इस पूरे विवाद को कैसे संभालते हैं.

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