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UP News: वोट कटवाने की साजिश का दावा, जिला अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई का ऐलान

Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर वोटर लिस्ट और फॉर्म-7 को लेकर घमासान छिड़ गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि फॉर्म-7 के जरिए जिन नामों को हटाने की कोशिश की जा रही है, वे सभी पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग से जुड़े हैं।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि “फर्जी फॉर्म-7 में जितने भी नाम दिखे, वो सब पीडीए हैं।” उन्होंने दावा किया कि जिन जातियों और समुदायों के नाम सूची में सामने आए हैं, वे मुख्य रूप से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समाज से संबंधित हैं।

क्या है फॉर्म-7 विवाद?

फॉर्म-7 चुनावी प्रक्रिया में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए उपयोग किया जाता है। अखिलेश का आरोप है कि इस प्रक्रिया का दुरुपयोग कर विशेष वर्ग के वोटरों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिन नामों को हटाया जा रहा है, उनकी “कहानी जाति से जाकर मिलती है।”

उन्होंने चुनाव आयोग पर भी निशाना साधते हुए कहा कि अगर पूरी सूची सार्वजनिक कर दी जाए, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। साथ ही उन्होंने मांग की कि सुनवाई केंद्र 1-2 किलोमीटर के दायरे में बनाए जाएं और लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुना जाए।

“कयामत तक लड़ेंगे”

अखिलेश यादव ने स्पष्ट कहा कि समाजवादी पार्टी इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी। “जिला प्रशासन से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ी जाएगी,” उन्होंने ऐलान किया। उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और ‘पीडीए प्रहरी’ को सतर्क रहने और हर पीड़ित मतदाता की मदद करने का निर्देश दिया।

उनका नारा साफ था—“एक भी वोट न कटने पाए, एक भी वोट न घटने पाए!”

पंचायत चुनाव और आरक्षण पर भी हमला

सपा अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि पंचायत चुनावों को आरक्षण के नाम पर टाला जा रहा है, क्योंकि सरकार को हार का डर है। उन्होंने कहा कि गांव-गांव में जनता बदलाव के मूड में है और यही वजह है कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है।

राजनीतिक संदेश क्या है?

अखिलेश यादव का यह बयान सिर्फ फॉर्म-7 तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आगामी चुनावों से पहले पीडीए वर्ग को एकजुट करने की रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है। उन्होंने भाजपा पर “वर्चस्ववादी राजनीति” का आरोप लगाया और कहा कि वोट का अधिकार छीना गया तो सब कुछ छिन जाएगा।

अब सवाल यह है कि चुनाव आयोग और राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। फिलहाल, यूपी की सियासत में फॉर्म-7 नया चुनावी हथियार बन चुका है और यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमा सकता है।

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