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बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार से लेकर भारत की विदेश नीति तक, शंकराचार्य के बयान ने सियासी और सामाजिक बहस छेड़ दी

Swaraj Times Desk: बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का तीखा बयान सामने आया है. उन्होंने इन घटनाओं के लिए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में शरण दिए जाने को जिम्मेदार ठहराया. शंकराचार्य ने कहा कि इस फैसले के कारण बांग्लादेश में भारत के प्रति गुस्सा बढ़ा है और वहां “पाकिस्तान जैसा स्वभाव” उभर रहा है, जिसका सीधा असर हिंदू अल्पसंख्यकों पर पड़ रहा है.

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि भारत ने शेख हसीना को सुरक्षित पनाह देकर मानवीय कदम उठाया, लेकिन अब इसके दुष्परिणाम सामने आ रहे हैं. उनके अनुसार, अगर इस मुद्दे पर समय रहते ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो बांग्लादेश की स्थिति और बिगड़ सकती है. उन्होंने सुझाव दिया कि शेख हसीना को किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जानी चाहिए, ताकि वहां की जनता का गुस्सा भारत की ओर न बढ़े.

देवकीनंदन ठाकुर और शाहरुख खान पर टिप्पणी

शंकराचार्य ने इस दौरान कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर के बयान का समर्थन करते हुए अभिनेता शाहरुख खान को लेकर भी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि जो लोग भारत में रहकर प्रसिद्धि और सम्मान पाते हैं, उन्हें बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार से फर्क पड़ना चाहिए. शंकराचार्य ने कहा कि भारतीय हिंदुओं ने कलाकारों को स्टार बनाया है, इसलिए उनकी पीड़ा के साथ खड़ा होना नैतिक जिम्मेदारी है.

PDA पंचांग पर सवाल

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने समाजवादी पार्टी द्वारा जारी PDA पंचांग पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि इसमें पारंपरिक पंचांग के योग, करण और अन्य तत्व नहीं हैं, इसलिए इसे पंचांग कहना ही गलत है. उनके अनुसार, समाजवादी विचारधारा किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं होती, लेकिन PDA पंचांग समाज को बांटने का संकेत देता है.

सोमनाथ मंदिर और पीएम मोदी पर बयान

सोमनाथ मंदिर के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि हर विषय में नेहरू का नाम लाना अब एक आदत बन चुकी है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर नरेंद्र मोदी सोमनाथ मंदिर को याद करते हैं, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यह देश की आस्था और इतिहास से जुड़ा स्थल है.

शंकराचार्य के इन बयानों के बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा, भारत की विदेश नीति और देश के भीतर राजनीतिक विमर्श को लेकर नई बहस तेज हो गई है.

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