इस्तीफा, आरोप और विवाद — बरेली में अफसर बनाम अफसर की टकराहट ने खड़े किए बड़े सवाल
Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश के बरेली में प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हलचल मच गई जब सिटी मजिस्ट्रेट पद से इस्तीफा देने वाले PCS अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने जिला अधिकारी (DM) कार्यालय में खुद को “बंधक बनाए जाने” का गंभीर आरोप लगाया। उनके दावों के बाद मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया, लेकिन अब बरेली के जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।
🏛️ क्या बोले सिटी मजिस्ट्रेट?
अलंकार अग्निहोत्री ने दावा किया कि उन्हें बातचीत के लिए डीएम कार्यालय बुलाया गया था, जहां उन्हें अकेले बैठाकर मानसिक दबाव बनाया गया। उनका कहना है कि इस दौरान उन्हें छुट्टी लेकर “आराम” करने की सलाह दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि डीएम के पास आए एक फोन कॉल में किसी ने अपमानजनक टिप्पणी करते हुए कहा, “पंडित पागल हो गया है, इसे जाने मत देना।”
अग्निहोत्री के मुताबिक, वे किसी तरह वहां से निकलकर अपनी जान बचा सके।
DM का जवाब
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने पूरे घटनाक्रम को “गलत प्रस्तुति” बताया। उन्होंने कहा कि बातचीत सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा थी और इसमें अन्य अधिकारी भी मौजूद थे। लगभग 45 मिनट चली बैठक में अग्निहोत्री के इस्तीफे की वजह समझने की कोशिश की गई थी। डीएम के अनुसार, किसी प्रकार की जबरदस्ती या बंधक बनाए जाने जैसी स्थिति नहीं थी।
इस्तीफे के पीछे क्या कारण?
अलंकार अग्निहोत्री ने अपने इस्तीफे को हालिया UGC नियमों और शंकराचार्य विवाद से जोड़ते हुए राज्य में “ब्राह्मण विरोधी माहौल” होने का आरोप लगाया है। उन्होंने एक विस्तृत पत्र में दावा किया कि नई शैक्षणिक नीतियों और प्रशासनिक व्यवहार से सामान्य वर्ग के छात्रों व शिक्षकों में असुरक्षा बढ़ रही है।
UGC नियमों पर विवाद
नए UGC इक्विटी रेगुलेशन 2026 में जातिगत भेदभाव की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है। आलोचकों का कहना है कि झूठी शिकायतों पर दंडात्मक प्रावधान हटने से नियमों के दुरुपयोग की आशंका है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की जा चुकी है।
बढ़ता राजनीतिक और सामाजिक तापमान
यह मामला अब सिर्फ एक प्रशासनिक विवाद नहीं रह गया है, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का मुद्दा बन चुका है। एक ओर अधिकारी के गंभीर आरोप हैं, दूसरी ओर प्रशासन उन्हें निराधार बता रहा है। सच क्या है, इसकी जांच आगे तय करेगी।
