प्रयागराज गंगा स्नान विवाद ने पकड़ा सियासी तूल, किसान नेता की एंट्री से बहस और तेज
Swaraj Times Desk: प्रयागराज में चल रहे शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गंगा स्नान विवाद ने अब धार्मिक और प्रशासनिक दायरे से निकलकर सियासी रंग भी पकड़ लिया है। इस पूरे मुद्दे पर भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संतों और किसानों की नाराज़गी देश के लिए भारी पड़ सकती है।
मुजफ्फरनगर जिले के पुरकाजी क्षेत्र में गणतंत्र दिवस के एक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे राकेश टिकैत ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि शंकराचार्य को गंगा स्नान करने दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह देश ऋषि और कृषि का देश है। जब-जब ऋषियों और किसानों के साथ छेड़छाड़ होती है, तब-तब देश में हलचल पैदा होती है। अगर संत नाराज़ होंगे और किसान नाराज़ होंगे, तो उसका असर पूरे देश पर पड़ेगा।”
टिकैत का यह बयान ऐसे समय में आया है जब प्रयागराज के माघ मेले में मौनी अमावस्या के दिन हुए घटनाक्रम को लेकर विवाद गहराया हुआ है। प्रशासन का कहना है कि उस दिन भारी भीड़ को देखते हुए किसी भी वीआईपी या विशेष व्यवस्था की अनुमति नहीं थी। अधिकारियों के अनुसार, शंकराचार्य अपने समर्थकों के साथ पालकी में स्नान स्थल की ओर बढ़े, जिससे बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण व्यवस्था प्रभावित हुई। इसी को लेकर प्रशासन और उनके समर्थकों के बीच तनातनी की स्थिति बन गई।
दूसरी ओर, धार्मिक संगठनों से जुड़े लोग इसे संतों के सम्मान से जोड़कर देख रहे हैं। उनका कहना है कि परंपरागत धार्मिक अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसी पृष्ठभूमि में टिकैत का बयान इस विवाद को किसान राजनीति और सामाजिक असंतोष के बड़े विमर्श से जोड़ता नजर आ रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह मामला केवल एक धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि आस्था, प्रशासनिक नियंत्रण और जनभावनाओं के बीच संतुलन की चुनौती बन गया है। संत समाज की भूमिका भारतीय समाज में ऐतिहासिक रूप से प्रभावशाली रही है, वहीं किसानों के आंदोलनों ने भी हाल के वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति को प्रभावित किया है।
ऐसे में राकेश टिकैत का यह बयान संकेत देता है कि यदि धार्मिक और ग्रामीण समाज की भावनाओं को लेकर असंतोष बढ़ा, तो इसका राजनीतिक असर भी दूरगामी हो सकता है। आने वाले दिनों में प्रशासन और संत समाज के बीच संवाद इस विवाद को शांत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
