Swami Avimukteshwaranand Saraswati News: मेरठ से मंत्री ओमप्रकाश राजभर का बड़ा बयान, संत समाज में भी बढ़ी हलचल
Swaraj Times Desk: उत्तर प्रदेश की सियासत में शंकराचार्य Swami Avimukteshwaranand Saraswati से जुड़े विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। योगी सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष Om Prakash Rajbhar ने इस मुद्दे पर तीखी टिप्पणी की है।
मेरठ में एबीपी न्यूज़ से बातचीत के दौरान राजभर ने कहा कि अगर किसी को राजनीति करनी है या राजनीतिक नेताओं पर आरोप लगाने हैं, तो उन्हें संत का चोला त्यागकर खुलकर राजनीतिक मैदान में उतरना चाहिए। उन्होंने कहा, “चोला पहनकर राजनीति करना ठीक नहीं है। राजनीति करनी है तो कुर्ता-पायजामा पहनकर सामने आइए।”
घटना की सच्चाई समझने की बात
राजभर ने बटुकों के साथ हुई कथित मारपीट को गलत बताया, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि किसी भी घटना को एकतरफा देखने के बजाय उसकी पूरी सच्चाई समझनी चाहिए। उनके बयान से साफ है कि सरकार इस मामले में संतुलित लेकिन सख्त रुख अपनाने के संकेत दे रही है।
संत समाज की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में शंकराचार्य Sadanand Saraswati ने बिना नाम लिए अपने गुरुभाई अविमुक्तेश्वरानंद का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि आचार्यों के प्रति ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए जिससे सनातन धर्म की छवि पर आंच आए।
सदानंद सरस्वती ने यह भी मुद्दा उठाया कि देश के कई हिंदू मंदिर सरकार के नियंत्रण में हैं, जबकि अन्य धर्मों के धार्मिक स्थलों पर ऐसा प्रावधान नहीं है। उन्होंने इसे असमानता बताते हुए सवाल खड़े किए। गो-रक्षा के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आंदोलनों को दबाने या षड्यंत्र करने की प्रवृत्ति उचित नहीं है।
बढ़ती राजनीतिक गर्मी
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े मामले ने धार्मिक और राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। जहां एक ओर मंत्री राजभर ने खुलकर टिप्पणी की है, वहीं संत समाज का एक वर्ग उनके समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है।
आने वाले दिनों में इस विवाद का राजनीतिक और सामाजिक असर और गहरा हो सकता है, क्योंकि यह मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं, बल्कि धर्म और राजनीति के रिश्तों पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
