India-Iran Relations: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच पूर्व RAW प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने ईरान की जीत की संभावना जताई और भारत-ईरान के मजबूत रिश्तों पर भी प्रकाश डाला।
Swaraj Times Desk: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध ने वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित किया है। ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारत पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। इसी बीच भारत की खुफिया एजेंसी RAW के पूर्व प्रमुख अमरजीत सिंह दुलत का बयान चर्चा में आ गया है।
अमरजीत सिंह दुलत ने कहा कि भारत और ईरान के संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि मौजूदा परिस्थितियों में ईरान इस संघर्ष में जीत हासिल कर सकता है। हालांकि उन्होंने इस पूरे युद्ध को चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
भारत-ईरान के पुराने रिश्ते
भारत और ईरान के बीच संबंध दशकों पुराने हैं। भारत की आजादी के बाद दोनों देशों ने कूटनीतिक रिश्ते स्थापित किए और समय के साथ सहयोग बढ़ता गया। 1950 से 1970 के दशक के दौरान, भले ही ईरान का झुकाव अमेरिका की ओर था, लेकिन उसने भारत के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे।
1979 में ईरान की इस्लामिक क्रांति के बाद उसकी विदेश नीति में बदलाव आया, लेकिन भारत ने तब भी संतुलन बनाए रखा। भारत ने एक ओर ईरान के साथ रिश्ते मजबूत रखे, वहीं दूसरी ओर पश्चिमी देशों से भी सहयोग जारी रखा।
ऊर्जा क्षेत्र में अहम भूमिका
ईरान लंबे समय तक भारत के लिए कच्चे तेल का एक प्रमुख स्रोत रहा है। भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में ईरान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के चलते इसमें उतार-चढ़ाव आते रहे हैं, फिर भी दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग एक अहम कड़ी बना हुआ है।
चाबहार पोर्ट: रणनीतिक साझेदारी
भारत-ईरान संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण पहलू चाबहार बंदरगाह परियोजना है। इस परियोजना के जरिए भारत को अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा पहुंच मार्ग मिलता है, जिससे पाकिस्तान को बायपास किया जा सकता है।
इसके अलावा इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) भी दोनों देशों के बीच व्यापार और कनेक्टिविटी को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहा है। यह कॉरिडोर भारत, ईरान और रूस को जोड़ता है।
युद्ध का भारत पर असर
मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है, खासकर तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के रूप में। इससे महंगाई बढ़ने की आशंका है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं।
क्या बदलेंगे समीकरण?
पूर्व RAW प्रमुख का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर तनाव चरम पर है। हालांकि युद्ध के नतीजे को लेकर अभी कुछ भी निश्चित नहीं कहा जा सकता, लेकिन इससे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और रणनीतिक समीकरणों में बदलाव तय माना जा रहा है।
